चंडीगढ़। डिब्बे में बगैर निर्माण तिथि तथा वैधता की जानकारी दिए गए घेवर को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तथा उनके परिवार तथा अन्य के सामने परोसने से रोक दिया गया।
सीएम के टीम में शामिल अधिकारी ने रोककर जब उसकी वैधता की जानकारी ली तो मिठाई बनाने वाले ने कहा यह दो से चार घंटे तक ही शुद्ध रहता है। जिसके बाद हड़कंप मच गया और प्रशासनिक अधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फटकार लगा जांच कराने को कहा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अपनी पत्नी सुमन सैनी तथा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता तथा अन्य के साथ बुधवार को मथुरा स्थित वृंदावन में बांके बिहारी के दर्शन करने के लिए निकले थे।
उनके कार्यक्रम में पलवल जिला के होडल स्थित डबचिक पर्यटन स्थल पर रुककर नाश्ता करने के बाद मीडिया से भी बातचीत करना था। मेन्यु में घेवर भी दर्ज था। परोसे जाने से कुछ ही देर पहले मुख्यमंत्री की टीम में से एक अधिकारी घेवर डिब्बे की जांच की तो उसमें उत्पादन और वैधता तिथि नहीं दर्ज थी, जो अनिवार्य है। जिसके बाद घेवर को परोसने से रोक दिया गया।

वहीं दो दिन के अंदर गुरुग्राम, पलवल , फरीदाबाद , सोनीपत सहित कई जिलों में मिठाई की दुकानों छापेमारी की पांच सौ से अधिक सैंपल लिए गए।
हालांकि, सैंपल की रिपोर्ट जब तक आएगी सावन में होने वाले त्योहार निकल गए होंगे और हजारों की संख्या में लोग घेवर खा चुके होंगे। बड़ा सवाल है कि आम जन के स्वास्थ्य को लेकर जिम्मेदार क्यों नहीं अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
