बाहरी दिल्ली के पूठकलां इलाके में एक सात साल की बच्ची की आवारा कुत्ते के काटने के 25 दिन बाद मौत हो गई। बच्ची का नाम छवि शर्मा था। 30 जून को उसे कुत्ते ने हाथ और पैर में चार जगह काट लिया था। उसके बाद इलाज के लिए उसे एंटी-रेबीज के टीके लगवाए गए। लेकिन इलाज के दौरान लापरवाही और सही समय पर इलाज न मिलने की वजह से उसकी हालत खराब होती गई और 26 जुलाई को उसने दम तोड़ दिया।

30 जून को छवि पास के एक रिश्तेदार के घर जा रही थी, तभी गली में एक आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। कुत्ते ने उसके हाथ और पैर पर चार जगह काट लिया। इसके बाद तुरंत उसके परिवार ने उसे रोहिणी के अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया। वहां छवि को एंटी-रेबीज का पहला डोज दिया गया। कुछ दिनों बाद दूसरा डोज भी लग गया। तीसरे डोज के लिए 28 जुलाई की तारीख तय थी, लेकिन 23 जुलाई को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई।

छवि की तबीयत बिगड़ते ही उसके परिवार ने उसे फिर से अंबेडकर अस्पताल लेकर गए। वहां डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताई और उसे आरएमएल अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन आरएमएल में बेड न होने की वजह से उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। 24 जुलाई की शाम डॉक्टरों ने उसे घर जाने की अनुमति दी। लेकिन घर लौटने के बाद उसकी तबीयत फिर से खराब हो गई, तब उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 26 जुलाई तड़के उसकी मौत हो गई।

डॉक्टरों ने छवि की मौत का कारण दिमाग में संक्रमण बताया है, लेकिन उन्होंने रेबीज की पुष्टि नहीं की। परिवार का मानना है कि यह संक्रमण कुत्ते के काटने से हुआ हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि छवि को गले से पानी निगलने में दिक्कत हो रही थी और तेज बुखार भी था।

छवि के परिवार ने कहा कि दिल्ली नगर निगम के अधिकारी आवारा कुत्तों के खतरे को नजरअंदाज कर रहे थे। इलाके में कई आवारा कुत्ते घूम रहे थे, जिनके खिलाफ कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिवार ने सुल्तानपुरी थाने में निगम अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है और न्याय की मांग की है।

पूठकलां के अलावा अलीपुर इलाके में भी हाल ही में चार वर्षीय बच्चे पर कुत्तों ने हमला किया था, जिसमें बच्चे के चेहरे और होंठ पर कई जगह काटे गए थे। उस घटना के बाद स्थानीय निगम ने तीन कुत्तों को पकड़ा था। परिवार का दर्द छवि की मां की छवि के जन्म के बाद ही मौत हो गई थी। उसे उसके चाचा-चाची ने गोद लिया था। छवि नगर निगम के स्कूल में चौथी कक्षा की छात्रा थी। उसकी अचानक मौत से परिवार के लोग सदमे में हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2023 में आवारा कुत्तों के नसबंदी और टीकाकरण पर तेजी लाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कुत्तों के काटने के मामले कम नहीं हुए हैं। 2020 से 2022 तक 44 हजार से ज्यादा कुत्तों के काटने के मामले दर्ज हुए हैं और 2018 से 2022 के बीच रेबीज से 37 मौतें हुईं हैं। इससे पहले तुगलक लेन और वसंत कुंज में भी बच्चों की रेबीज से मौतें हो चुकी हैं।

छवि की मौत ने फिर से आवारा कुत्तों के खतरे और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों को उजागर कर दिया है। आवारा कुत्तों की सही तरीके से नसबंदी, टीकाकरण और समय पर बेहतर इलाज ही इस तरह की दुखद घटनाओं को रोक सकता है। 

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