हरियाणा के करनाल जिले से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है। असंध क्षेत्र के गांव बल्लाह निवासी 21 वर्षीय अनिल कुमार मान का शव 15 दिन बाद अमेरिका से उसके पैतृक गांव पहुंचा। जिस बेटे को परिवार ने बेहतर भविष्य के सपने के साथ विदेश भेजा था, उसी का शव ताबूत में घर पहुंचा तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार के लोगों ने बिलखते हुए बेटे के अंतिम दर्शन किए।
शनिवार को गांव की शिवपुरी में अनिल का अंतिम संस्कार किया गया। पिता ऋषिपाल ने अपने इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी। इस दौरान गांव के लोग भी परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।
4 अक्टूबर को अमेरिका में बिगड़ी थी तबीयत
जानकारी के अनुसार, अनिल की 4 अक्टूबर को अमेरिका में अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उसकी मौत हो गई। मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
परिजनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेटे के शव को भारत लाने की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और शव को विदेश से लाने में लाखों रुपये का खर्च आने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। परिवार ने सरकार से भी मदद की गुहार लगाई थी।
बेटे को अमेरिका भेजने के लिए बेची जमीन, लिया कर्ज
अनिल ने दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बेहतर भविष्य बनाने के सपने के साथ उसने अमेरिका जाने का फैसला किया। पिता ऋषिपाल ने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए अपनी जमीन बेच दी और कर्ज भी लिया।
परिवार ने करीब 45 लाख रुपये खर्च कर अनिल को डंकी रूट के जरिए अमेरिका भेजा था। कई महीने का सफर तय करने के बाद अनिल अमेरिका पहुंचा था। परिवार को उम्मीद थी कि वह वहां मेहनत करके आर्थिक स्थिति सुधारेगा और घर की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाएगा। लेकिन उसकी अचानक मौत से परिवार के सारे सपने अधूरे रह गए।
दो परिवारों का इकलौता चिराग था अनिल
अनिल अपने पिता ऋषिपाल का इकलौता बेटा था। वहीं, ऋषिपाल के भाई रामपाल की भी केवल एक बेटी है। ऐसे में अनिल दोनों परिवारों के लिए इकलौता बेटा और बड़ी उम्मीद था। उसकी मौत से दोनों परिवारों में मातम पसरा हुआ है।
भाई का शव देखकर बहन का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव में हर किसी की आंखें नम थीं और परिवार को सांत्वना देने के लिए ग्रामीण घर पहुंचे।
अमेरिका में रह रहे गांव के युवकों ने की मदद
आर्थिक तंगी के कारण परिवार के लिए अनिल का शव भारत लाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे समय में अमेरिका में रह रहे गांव के युवकों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। उन्होंने आपस में लाखों रुपये जुटाए और शव को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग किया।
करीब 15 दिन के इंतजार के बाद अनिल का शव दिल्ली एयरपोर्ट से एंबुलेंस के जरिए गांव बल्लाह पहुंचा। इसके बाद परिवार और ग्रामीणों की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
जिस बेटे को बेहतर जिंदगी की उम्मीद में विदेश भेजा गया था, उसकी इतनी कम उम्र में मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। परिवार के लिए यह दुख ऐसा है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।

