जीवन में आपकी इच्छाएं अगर पूरी नहीं हो पा रही हैं। सिर्फ निराशा ही निराशा मिल रही है, तो सफला एकादशी आपके सभी परेशानियों को दूर करने में किसी वरदान की तरह काम करेगा। सनातन धर्म में सफला एकादशी के महत्व को एक अनोखी उपाधि प्राप्त है। कहते हैं कि इस दिन उपवास रखने से आप सुख-समृद्ध से भर जाते हैं। स्वास्थ्य संबंधी सभी कष्ट पल भर में दूर हो जाते हैं। इस साल सफला एकादशी और साल का आखिरी एकादशी 30 दिसंबर को है। सफला एकादशी का व्रत पौष कृष्ण एकादशी को रखा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन चावल नहीं खाना चाहिए। मान्यता है कि अगर इस दिन चावल खाया जाए तो अगले जन्म में व्यक्ति रेंगने वाला जीव बनता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। साथ ही सात्विकता का पालन भी करना चाहिए। इस दिन जो व्यक्ति उपवास रखता है उसे धन, मान-सम्मान और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
एकादशी पर ब्रह्नाचार्य का पालन करना चाहिए। इस दिन किसी भी व्यक्ति के साथ कठोर शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। साथ ही लड़ाई-झगड़े से भी बचना चाहिए। सुबह जल्दी उठना चाहिए। साथ ही शाम के समय भी नहीं सोना चाहिए। इस दिन किसी को दान किया जाना बेहद उत्तम माना जाता है। इस दिन अगर गंगा स्नान किया जाए तो बेहतर होता है। अगर आपको विवाह संबंधी बाधा आ रही है तो एकादशी के दिन व्यक्ति को केसर, केला या हल्दी का दान करना चाहिए।
सफला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को एक हजार वर्षों की तपस्या से प्राप्त पुण्य के समान फल की प्राप्ति होती है। सफला एकादशी का महत्व सनातन शास्त्र में विस्तार से बताया गया है। एकादशी में रात्रि जागरण का विधान है। ज्योतिषियों के अनुसार, एकादशी पर यदि कुछ विशेष मंत्रों का जाप किया जाए तो घर में शांति बनी रहती है। आगे जानिए सफला एकादशी पर किन मंत्रों का जाप करना चाहिए
सफला एकादशी का शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारम्भ – 29 दिसंबर, 2021 बुधवार दोपहर 04:12 मिनट से
- एकादशी तिथि समाप्त -30 दिसंबर 2021 गुरुवार दोपहर 01: 40 मिनट तक
- सफला एकादशी व्रत का पारण मुहूर्त- 31 दिसंबर 2021, शुक्रवार सुबह 07:14 मिनट से सुबह 09:18 मिनट तक
विष्णु मंत्र
1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
2.ॐ ह्रीं श्री लक्ष्मीवासुदेवाय नमः
3.ॐ नमो नारायण
इस विधि से करें मंत्रों का जाप
1. सफला एकादशी की सुबह स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। संभव हो तो पीले रंग की धोती पहनें।
2. इसके बाद किसी साफ स्थान पर चौकी स्थापित कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
3. पीले कपड़े पहनकर भगवान विष्णु को गाय के दूध से, फिर शंख में गंगाजल भर कर स्नान कराएं।
4. भगवान विष्णु को पीले कपड़े पहनाएं और धूप, दीप से पूजा करें।
5. पूजा में पीले फूल, फल और पीले चंदन से उनका शृंगार करें उन्हें तुलसी मिला पंचामृत जरूर अर्पित करें।
6. इसके बाद तुलसी की माला से ऊपर बताए गए किसी 1 मंत्र का जाप करें। कम से कम 11 माला जाप अवश्य करें।
7. इस प्रकार मंत्र जाप करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और सभी तरह की परेशानियां दूर होती हैं।
