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रोहतक पुलिस की चेतावनी: साइबर ठगों का नया हथियार बने ‘म्यूल अकाउंट्स’, युवाओं-छात्रों से सतर्क रहने की अपीलSP गौरव राजपुरोहित बोले— लालच में बैंक खाता, सिम या UPI ID साझा करने वाले भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं

पुलिस अधीक्षक श्री गौरव राजपुरोहित ने बताया कि डिजिटल युग में जहां तकनीक ने लोगों के जीवन को आसान बनाया है वहीं साइबर अपराधियों ने भी ठगी के नए-नए तरीके विकसित कर लिए हैं। प्रदेश सहित देशभर में इन दिनों साइबर अपराधियों द्वारा “म्यूल अकाउंट्स” के माध्यम से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा है। इस गंभीर साइबर खतरे को देखते हुए आमजन को सतर्क करते हुए कहा है कि थोड़े से लालच या लापरवाही के कारण कोई भी व्यक्ति अनजाने में साइबर अपराधियों का सहयोगी बन सकता है। पुलिस अधीक्षक श्री गौरव राजपुरोहित ने बताया कि साइबर अपराधी अब बेरोजगार युवाओं, छात्रों, गृहिणियों तथा पार्ट-टाइम रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बना रहे हैं। ठग सोशल मीडिया, मैसेजिंग एप्स, टेलीग्राम चैनलों, फर्जी जॉब पोर्टलों तथा अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए लोगों को घर बैठे कमाई, पार्ट-टाइम जॉब, कमीशन आधारित कार्य अथवा आसान आय का लालच देते हैं। इसके बाद वे लोगों से उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग विवरण अथवा यूपीआई आईडी का उपयोग करने की अनुमति मांगते हैं। उन्होंने बताया कि कई मामलों में अपराधी खाताधारक को कुछ हजार रुपये का लालच देकर उसके खाते का उपयोग अपने अवैध लेन-देन के लिए करते हैं। इसके माध्यम से साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित किया जाता है, जिससे अपराधियों की वास्तविक पहचान छिपी रहे। यही खाते आगे चलकर मनी लॉन्ड्रिंग, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, निवेश घोटालों, फर्जी लोन ऐप अपराधों तथा अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े लेन-देन में इस्तेमाल किए जाते हैं।

क्या होता है म्यूल अकाउंट?
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि “म्यूल अकाउंट” ऐसा बैंक खाता होता है जो किसी आम नागरिक के नाम पर खुला होता है, लेकिन उसका संचालन या उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा अवैध धनराशि के लेन-देन के लिए किया जाता है। कई बार खाताधारक को यह जानकारी तक नहीं होती कि उसका बैंक खाता किसी साइबर अपराध में उपयोग किया जा रहा है। हालांकि कानून की नजर में ऐसा खाता अपराध की जांच का हिस्सा बन जाता है और संबंधित खाताधारक को भी पूछताछ, जांच अथवा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों का उद्देश्य स्वयं सामने आए बिना दूसरों के खातों का उपयोग करके अपनी पहचान छिपाना होता है। इसलिए नागरिकों को विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है।
युवाओं को बनाया जा रहा प्रमुख निशाना
एसपी गौरव राजपुरोहित ने बताया कि हाल के समय में ऐसे मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है, जिनमें छात्रों और बेरोजगार युवाओं को आसान कमाई का लालच देकर उनके बैंक खाते और डिजिटल पहचान का दुरुपयोग किया गया। कई लोग अनजाने में अपने खाते, यूपीआई आईडी या सिम कार्ड दूसरों को उपयोग करने के लिए दे देते हैं, जिसके बाद वे स्वयं भी कानूनी परेशानियों में घिर जाते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी वैध संस्था, कंपनी या नियोक्ता किसी व्यक्ति के बैंक खाते का उपयोग अपने लेन-देन के लिए नहीं करता। यदि कोई व्यक्ति या संस्था ऐसा प्रस्ताव देती है तो यह साइबर अपराध का स्पष्ट संकेत हो सकता है।
रोहतक पुलिस की नागरिकों से महत्वपूर्ण अपील

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