सोनीपत के खूबडू हेड से जेएलएन नहर में पानी छोड़ दिया गया है। यह पानी 28 अप्रैल की सुबह जिले के जेएलएन नहर में पहुंचेगा। इसके बाद कालाका जलघर के वाटर टैंकों को भरा जाएगा। 30 अप्रैल से पानी की नियमित आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। अगले 16 दिनों तक नियमित जलापूर्ति से लोगों को राहत मिलेगी।
शहर में जलसंकट गहरा गया है। जलापूर्ति के समय में कटौती की गई है। शहरवासियों को एक समय ही मिल रहा है। नहरी जलापूर्ति बंद होने से जलघरों के तालाब सूखने के कगार पर हैं। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कहना है कि शहर के जलघरों में केवल एक दिन का पानी ही शेष है। कालाका जलघर में अभी अलग-अलग क्षमता के पांच वाटर टैंक बनाए गए हैं। इनमें पानी क्षमता से ज्यादा भरने के बाद भी शहर में लगभग 20 दिन सप्लाई दी जा सकती है।

अब समस्या इसलिए आ रही है कि नहरी पानी का शेड्यूल बदला हुआ है। नहर में 15 दिन पानी चलता है और 24 दिन बंद रहता है। टैंकों की क्षमता कम है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी का स्टोरेज नहीं हो पाता है, जिससे शहर में खासकर गर्मी के दिनों में यह समस्या अक्सर आ जाती है। अगर यहां एक टैंक और बने तो हालात सुधर सकते हैं

शहर की आबादी बढ़ने के साथ टैंकों की स्टोरेज क्षमता कम पड़ने लगी है। शहर में प्रतिदिन करीब 27.82 मिलियन लीटर पानी की खपत होती है। लिसाना वाटर वर्क्स से प्रतिदिन 5.32 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। कालाका वाटर वर्क्स से प्रतिदिन 22.5 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति है। जन स्वास्थ्य विभाग के पास स्टोरेज क्षमता कम होने के कारण शहर को पर्याप्त पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही।
विभाग के शहर में 35 हजार के करीब रजिस्टर्ड उपभोक्ता हैं। इसके अलावा कई नई कॉलोनियों में भी काफी कनेक्शन किए जा चुके हैं, जो बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। विभाग की ओर से इन कनेक्शनों को भी नियमित किया जा रहा है।

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