चंडीगढ़/पानीपत। रेलवे में ग्रुप-D की नौकरी पाने के लिए करीब 13 साल से संघर्ष कर रहे हरियाणा के पानीपत निवासी दीपक को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की चंडीगढ़ बेंच से राहत मिली है। रेलवे ने हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर में अंतर मिलने के आधार पर उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। अब ट्रिब्यूनल ने उनके अंगूठे के निशानों की सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब (CFSL) से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
आदेश के अनुसार, यदि फॉरेंसिक जांच में अंगूठे के निशान संबंधित भर्ती के दस्तावेजों से मेल खाते हैं, तो रेलवे को दीपक को नियुक्ति देनी होगी। ट्रिब्यूनल ने पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी करने को कहा है।
2013 में निकली थी 5,679 पदों पर भर्ती
दीपक पानीपत जिले की समालखा तहसील के गांव सहरमालपुर के निवासी हैं। उत्तरी रेलवे ने 30 दिसंबर 2013 को विभिन्न मंडलों में ग्रुप-D के 5,679 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की थी।
दीपक के अनुसार, उन्होंने लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और मेडिकल जांच समेत भर्ती के सभी चरण पास कर लिए थे। हालांकि, दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान उनके आवेदन फॉर्म, OMR शीट और अन्य कागजात में हैंडराइटिंग तथा हस्ताक्षर का अंतर सामने आया।
मामले को विशेषज्ञ जांच के लिए भेजा गया। लिखावट में अंतर पाए जाने के बाद रेलवे ने उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी।
उम्मीदवार ने उठाया फिंगरप्रिंट जांच का मुद्दा
रेलवे के फैसले को दीपक ने कैट में चुनौती दी। उनकी ओर से दलील दी गई कि उन्होंने भर्ती के सभी चरण पूरे किए थे और पहचान को लेकर संदेह होने पर दस्तावेजों पर मौजूद अंगूठे के निशानों की वैज्ञानिक जांच कराई जा सकती है।
उनके वकील ने भी अदालत में पहचान की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच का विकल्प अपनाने की दलील रखी।
फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर होगा फैसला
कैट की चंडीगढ़ बेंच ने अंगूठे के निशानों की CFSL से जांच कराने का निर्देश दिया है। जांच में निशान मेल खाने की स्थिति में रेलवे को दीपक की नियुक्ति करनी होगी। पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह में पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस आदेश से दीपक की नियुक्ति का मामला अब फॉरेंसिक जांच के नतीजे पर निर्भर करेगा। करीब 13 साल से चल रहे इस विवाद में अब वैज्ञानिक जांच के आधार पर उनकी पहचान सत्यापित की जाएगी।

