देश में चीनी के दामों ने रिकॉर्ड स्तर छू लिया है। उत्तर प्रदेश की एम-ग्रेड चीनी का एक्स-फैक्ट्री भाव मंगलवार को 5,400 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया। इस पर 5 फीसदी जीएसटी अलग से लागू है। वहीं खुदरा बाजार में करीब एक महीने पहले 45 रुपये किलो मिलने वाली चीनी अब कई जगहों पर 65 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
चीनी की थोक कीमतों में करीब 32 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी कीमतों में तेजी बनी रह सकती है। उत्पादन में कमी के साथ-साथ चीनी के निर्यात और इथेनॉल उत्पादन के चलते चालू सीजन के अंत तक देश में चीनी का स्टॉक कई दशकों के निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान है।
आयात की नौबत आ सकती है: अगर कीमतों में तेजी जारी रहती है तो घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार को चीनी आयात का विकल्प अपनाना पड़ सकता है। फिलहाल चीनी के आयात पर 100 फीसदी सीमा शुल्क लागू है। ऐसे में शुल्क-मुक्त आयात का फैसला घरेलू चीनी उद्योग और गन्ना किसानों दोनों को प्रभावित कर सकता है।
सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए उठाए कदम: चीनी की बढ़ती कीमतों और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी के भंडारण की सीमा तय की है। प्रत्येक डीलर के लिए अधिकतम 4,000 क्विंटल चीनी रखने की सीमा निर्धारित की गई है। सरकार ने चीनी मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश भी दिए हैं। हालांकि, ट्रेडर्स और बिचौलियों की ओर से स्टॉक जमा किए जाने के कारण कीमतों में कमी आने के बजाय तेजी और बढ़ने की बात सामने आ रही है।
चीनी मिलों पर भी सरकार सख्त: खाद्य मंत्रालय ने कुछ चीनी मिलों पर घोषित मात्रा से अधिक स्टॉक रखने और सौदे होने के बाद चीनी की आपूर्ति में देरी करने के आरोप लगाए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, इससे बाजार में सट्टेबाजी को बढ़ावा मिल रहा है। 14 अगस्त को चीनी निदेशालय की ओर से मिलों को भेजे गए पत्र में चेतावनी दी गई कि स्टॉक में गड़बड़ी मिलने पर आवश्यक वस्तु कानून और शुगर कंट्रोल ऑर्डर, 2025 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
क्लोजिंग स्टॉक दशकों के निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान: अनुमान है कि 30 सितंबर 2026 को चालू सीजन के अंत में देश में चीनी का क्लोजिंग स्टॉक करीब 30 से 33 लाख टन रह सकता है। यह कई दशकों में सबसे कम क्लोजिंग स्टॉक होगा। इससे 2026-27 के नए सीजन के शुरुआती महीनों में चीनी की सप्लाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है।चीनी मिलों ने सप्लाई बढ़ाने के लिए आगामी सीजन की पेराई जल्द शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इसके बदले मिलों ने जीएसटी में छूट समेत कई रियायतों की मांग की है। हालांकि, व्यावहारिक दिक्कतों के चलते समय से पहले पेराई शुरू करना आसान नहीं माना जा रहा।
वहीं, सरकार ने 24 जुलाई को चीनी मिलों में स्टॉक के भौतिक सत्यापन के आदेश दिए थे, जिसे 14 अगस्त तक पूरा किया जाना था। सत्यापन पूरा होने के बावजूद सरकार ने अभी तक स्टॉक के आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। माना जा रहा है कि आंकड़े सामने आने से बाजार में चल रही अटकलों पर कुछ हद तक रोक लग सकती है।
