हरियाणा में ड्रॉप आउट को रोकने के लिए विशेष फोकस किया जा रहा है। वहीं, नए शैक्षणिक सत्र के तहत 1 अप्रैल से सरकारी स्कूलों में दाखिले शुरू होने जा रहे हैं। ड्रॉप आउट को रोकने के लिए स्कूलों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बेहतर काम करने वालों को रैंकिंग के आधार पर प्रोत्साहित भी किया जाएगा।
हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों, जिला परियोजना समन्वयकों, खंड शिक्षा अधिकारियों, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारियों, सभी स्कूल मुखिया व इंचार्ज, सभी स्कूल प्रबंधन समिति चेयरमैनों को पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने राज्य को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के तहत जीरो ड्रॉप आउट बनाने और सरकारी स्कूलों में प्रवेश उत्सव कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत प्राथमिक से 18 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाना मुख्य कार्य है। राज्य में 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शत-प्रतिशत नामांकन, ठहराव, संक्रमण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 2 एवं 3 के अनुपालन का अनिवार्य अंग है।
30 अप्रैल तक आयोजित होने वाले नामांकन व प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में सरकारी स्कूलों की सुविधाओं को आम नागरिकों, विद्यार्थियों व अभिभावकों तक पहुंचाने का काम किया जाएगा। स्कूल मुखिया व एसएमसी के साथ मिलकर अभियान चलाया जाए। वहीं जिन बच्चो के ड्रॉप आउट होने की अधिक संभावना है, उनसे व्यक्तिगत संपर्क किया जाए।
1 अप्रैल से दाखिला प्रक्रिया आरंभ होगी। वहीं 1 अप्रैल को ही सभी राजकीय विद्यालयों में परीक्षा परिणाम घोषित किए जाएंगे। इसी दिन बच्चों को नई अगली कक्षा की पुस्तकों का वितरण किया जाएगा। सबसे ज्यादा ड्राप आउट कक्षा 9 में होता है। विशेषकर लड़कियां इससे अधिक प्रभावित होती हैं। उन बालिकाओं की पहचान की जाए, जिनके माता-पिता उन्हें नौंवी कक्षा में पढ़ाना नहीं चाहते।
