यह पहली बार है कि हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में हो रहे आम चुनाव बिना राम रहीम के हो रहे हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकार की ओर से डेरा प्रमुख राम रहीम को इस बार चुनाव में पैरोल नहीं दी गई। जबकि, अब तक वह 2022 से 6 बार फरलो और पैरोल लेकर 192 दिन तक बाहर आ चुका है।
लगभग 200 दिन डेरा प्रमुख 3 राज्यों के पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा चुनाव में एक्टिव रह चुका है। 2 साध्वियों से रेप, पत्रकार छत्रपति और डेरा मैनेजर रणजीत सिंह मर्डर केस में जेल में बंद गुरमीत राम रहीम की फरलो-पैरोल को राजनीति के जानकार लोग इसे सिर्फ संयोग मानने को तैयार नहीं हैं।
उन्हें लगता है कि डेरा प्रमुख को मिलने वाली फरलो और पैरोल का कम से कम पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान चुनाव कनेक्शन जरूर होता है। डेरा प्रमुख को 25 अगस्त 2017 को रोहतक की सुनारिया जेल में भेजा गया था।
हाईकोर्ट ने सवाल उठाए थे। बलात्कार के दोषी को जनवरी में 50 दिन की पैरोल दी गई थी। यह लगभग 10 महीने में उसकी 7वीं और पिछले 4 वर्षों में 9वीं पैरोल थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार को 10 मार्च को राम रहीम का आत्मसमर्पण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
जिस दिन उसकी पैरोल समाप्त होने वाली थी, उसी दिन राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह अगली बार राम रहीम को पैरोल देने के लिए अदालत से अनुमति का अनुरोध करें। झटके के साथ ही पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह बताने का आदेश दिया था कि इस तरह से कितने लोगों को पैरोल दिया गया है। अदालत SGPC द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
