हरियाणा सरकार ने विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को और सरल बना दिया है। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने गांव के सचिव से ही विवाह प्रमाणपत्र बनवा सकेंगे। पहले यह सुविधा सिर्फ तहसील या नगर निकाय स्तर पर उपलब्ध थी। रविवार को हिसार जिला उपायुक्त (डीसी) अनीश यादव ने प्रक्रिया की जानकारी दी।

डीसी ने बताया कि नई व्यवस्था में माता-पिता की आधार आधारित सहमति मिलने पर दंपती को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी। इससे दूरदराज के नागरिकों को लंबे सफर और अतिरिक्त दस्तावेजों की परेशानी से राहत मिलेगी। विवाह प्रमाणपत्र पहले की तुलना में कम समय में जारी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना के तहत अनुसूचित जाति के गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की लड़कियों को 71 हजार रुपए शगुन के रूप में दिए जाते हैं। वहीं, 1 लाख 80 हजार रुपए से कम वार्षिक आय वाले अनुसूचित जाति व अन्य जातियों के परिवारों की लड़कियों को 41 हजार रुपए मिलते हैं। विधवाओं की लड़कियों को इस योजना के तहत 51 हजार रुपए कन्यादान के रूप में दिए जाते हैं।

हरियाणा लेबर डिपार्टमेंट के तहत मजदूर कॉपी बनी है तो लड़की के परिजनों को एक लाख एक हजार रुपये और लड़के की शादी पर 21 हजार रुपए का लाभ मिलता है। इसी प्रकार लेबर वेलफेयर डिपार्टमेंट के तहत हरियाणा कौशल रोजगार निगम में कार्यरत और निजी कम्पनियों में कार्यरत कर्मियों को 21 हजार और कर्मियों की बेटी की शादी पर 51 हजार रुपए का लाभ मिलता है।

– कन्यादान लेने के लिए। – फैमिली आईडी अलग बनवाने। – फैमिली आईडी में लड़की का नाम ट्रांसफर करने में सहायक। – विदेश जाने के लिए।

विवाह प्रमाण के लिए लड़का लड़की के आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र या डीएमसी, शादी के फोटो, परिजनों के आधार कार्ड, गवाह, पंडित की आईडी और विवाह कार्ड।

डीसी ने आगे कह कि सरकार ने विवाह पंजीकरण के लिए डिजिटल प्रक्रियाओं को भी प्रोत्साहित किया है, जिससे लोग घर बैठे https://shaadi.haryana.gov.in/ पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। सरकार की इस नई पहल से विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और ज्यादा से ज्यादा लोग इस सेवा का लाभ उठा पाएंगे

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