नई दिल्ली। भारत में जल्द ही ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट लोगों की जेब में दिखाई दे सकते हैं। केंद्र सरकार ने इन नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जानकारी दी कि सरकार 100 करोड़ ₹10 के नोट और 100 करोड़ ₹20 के नोट, यानी कुल 200 करोड़ प्लास्टिक नोट जारी करने की तैयारी कर रही है। इन नोटों का कुल मूल्य लगभग ₹3,000 करोड़ होगा।
यह योजना कोई नई नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पहली बार वर्ष 2009 में प्लास्टिक नोटों का प्रस्ताव रखा था और 2012 में तत्कालीन सरकार ने इसे मंजूरी भी दे दी थी। उस समय कोच्चि, मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला में पायलट प्रोजेक्ट के तहत ट्रायल होना था, लेकिन तकनीकी और अन्य कारणों से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब करीब 17 साल बाद इस प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू किया जा रहा है।
क्या होते हैं प्लास्टिक नोट?
प्लास्टिक नोट सामान्य प्लास्टिक से नहीं बनते, बल्कि बाय-एक्सिअली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) नामक विशेष पॉलिमर सामग्री से तैयार किए जाते हैं। यह सामग्री कागज की तुलना में अधिक मजबूत, लचीली और टिकाऊ होती है। ये नोट पानी, धूल, मिट्टी और तेल से आसानी से खराब नहीं होते तथा लंबे समय तक उपयोग में बने रहते हैं।
क्यों लाई जा रही है नई करेंसी?
RBI के सामने हर साल बड़ी संख्या में पुराने और फटे नोटों को बदलने की चुनौती रहती है। पिछले तीन वर्षों में RBI ने 8,270 करोड़ नए नोट जारी किए, जबकि 6,213 करोड़ पुराने नोट नष्ट करने पड़े। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले पॉलिमर नोट लागत कम करने और नोटों की गुणवत्ता बनाए रखने में मददगार साबित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक नोटों की उम्र कागज के नोटों की तुलना में 2 से 6 गुना अधिक होती है। साथ ही इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर जोड़ना आसान होता है, जिससे नकली नोटों पर भी काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
पहले क्यों रुक गया था प्रोजेक्ट?
जानकारों के मुताबिक 2012 के बाद यह योजना कई कारणों से आगे नहीं बढ़ सकी। उस समय देश के अधिकांश ATM और कैश हैंडलिंग मशीनें पॉलिमर नोटों के अनुकूल नहीं थीं। इसके अलावा नोटों की हैंडलिंग से जुड़ी तकनीकी चुनौतियां और वर्ष 2016 की नोटबंदी के बाद बदलती प्राथमिकताओं के कारण यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।
इस बार क्या होगा?
इस बार सरकार बड़े पैमाने पर फील्ड ट्रायल करेगी। इसके तहत देश के विभिन्न क्षेत्रों में इन नोटों के प्रदर्शन, टिकाऊपन और मशीनों के साथ उनकी अनुकूलता का परीक्षण किया जाएगा। यदि ट्रायल सफल रहता है तो भविष्य में ₹50, ₹100, ₹200 और ₹500 के नोट भी पॉलिमर सामग्री में लाने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि फिलहाल सरकार या RBI की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
दुनिया में कहां-कहां चल रहे हैं प्लास्टिक नोट?
दुनिया का पहला प्लास्टिक नोट 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने जारी किया था। इसके बाद कनाडा, न्यूजीलैंड, मालदीव, रोमानिया, वियतनाम सहित कई देशों ने पॉलिमर करेंसी अपनाई। वर्तमान में करीब 25 से अधिक देशों में प्लास्टिक नोटों का उपयोग हो रहा है, जबकि लगभग 12 देशों में पूरी करेंसी पॉलिमर आधारित है।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि प्लास्टिक नोटों के कई फायदे हैं, लेकिन इन्हें लागू करना आसान नहीं होगा। इसके लिए ATM, कैश काउंटिंग मशीनों और बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव करना पड़ सकता है। शुरुआती लागत भी कागजी नोटों की तुलना में अधिक होगी। इसके अलावा दुनिया के कुछ देशों में आधुनिक तकनीक की मदद से नकली पॉलिमर नोट बनाए जाने के मामले भी सामने आ चुके हैं।
फिलहाल सिर्फ ट्रायल
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अभी केवल ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाएगा। फिलहाल कागज के नोटों को पूरी तरह बंद करने या सभी मूल्यवर्ग के नोटों को प्लास्टिक में बदलने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। ट्रायल के नतीजों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
