पं. बी. शर्मा पीजीआईएमएस, रोहतक के मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट एवं साइंस-टेक इंस्टीट्यूट, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में “बायोस्टैटिस्टिक्स एंड सर्वाइवल एनालिसिस” विषय पर सात दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह कार्यशाला 21 मई से 27 मई 2026 तक वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें देशभर के विभिन्न मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, पैरामेडिकल, पब्लिक हेल्थ एवं रिसर्च संस्थानों से जुड़े 500 से अधिक चिकित्सकों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं शोध उन्मुख बताते हुए आयोजकों की सराहना की।
कार्यशाला का उद्देश्य स्वास्थ्य अनुसंधान में बायोस्टेटिस्टिक्स एवं सर्वाइवल एनालिसिस की उपयोगिता को समझाना तथा प्रतिभागियों को आधुनिक सांख्यिकीय तकनीकों एवं रिसर्च मेथोडोलॉजी का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था। सात दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा अध्ययन डिज़ाइन, सैंपलिंग तकनीक, सैंपल साइज निर्धारण, एपिडेमियोलॉजिकल स्टडी, मेटा एनालिसिस, हाइपोथेसिस टेस्टिंग, क्लिनिकल ट्रायल तथा सर्वाइवल एनालिसिस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत व्याख्यान दिए गए।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सॉफ्टवेयर के माध्यम से डेटा विश्लेषण का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। विशेषज्ञ वक्ताओं ने तकनीकों को सरल एवं प्रभावी उदाहरणों के माध्यम से समझाया, जिससे प्रतिभागियों को शोध कार्यों में इन तकनीकों के उपयोग की बेहतर जानकारी प्राप्त हुई।
आयोजन अध्यक्ष एवं निदेशक पीजीआईएमएस रोहतक डॉ. एस.के. सिंघल ने आयोजकों एवं प्रतिभागियों को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि संस्थान चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में निरंतर नवाचार और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. संजय कुमार ने बताया कि कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। सभी प्रतिभागियों को डिजिटल अध्ययन सामग्री, रिकॉर्डेड लेक्चर एवं 7 क्रेडिट घंटे सहित प्रमाण-पत्र उपलब्ध करवाए जाएंगे।
कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. एस.के. सिंह ने बताया कि कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों एवं विशेषज्ञों के बीच संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें शोध से संबंधित समस्याओं एवं सांख्यिकीय विश्लेषण से जुड़े प्रश्नों का समाधान किया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम युवा शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं।
समापन अवसर पर आयोजन समिति के सदस्यों ने भविष्य में भी इस प्रकार के अकादमिक एवं अनुसंधान आधारित कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
