रोहतक जिले में पीने के पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। शहर में बनाए गए 4 जलघर सूख चुके है और लोगों के घरों तक सप्लाई बाधित है। नहर में कल 1200 क्यूसेक पानी छोड़ा भी गया है, लेकिन वह पानी भी जलघरों तक नहीं पहुंच पा रहा। ऐसे में लोगों को एक-एक बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।

रोहतक में जवाहर लाल नेहरु कैनाल और भालौठ सब ब्रांच, दो प्रमुख नहर है, जिनसे न केवल पीने के पानी की आपूर्ति होती है। बल्कि सिंचाई के लिए भी पानी प्रयोग किया जाता है। घरों में पानी सप्लाई का एकमात्र स्त्रोत ये दोनों नहरें ही है। लेकिन पीछे 16 दिन नहर बंद रही, जिसके कारण जलघर भी सूख गए और पानी की सप्लाई बाधित रही। जनस्वास्थ्य विभाग भी नहर में पानी आने का इंतजार कर रहा था।

गत दिवस नहर में पानी तो आया, लेकिन 1200 क्यूसेक पानी छोड़ने के बाद भी जलघरों तक पानी नहीं पहुंच सका। जलघरों तक पानी न पहुंचने के पीछे जनस्वास्थ्य विभाग की लापरवाही रही। क्योंकि जब नहर बंद थी, तब मोगों की सफाई नहीं करवाई। जब नहर आई तो मोगे रुके हुए थे, जिससे पानी रजवाहों के जरिए जलघरों तक नहीं पहुंचा।

जेएलएन की बात करें तो यह यमुना नदी से दक्षिण हरियाणा में सिंचाई और पीने के पानी का मुख्य स्त्रोत है। यह झुब्रो हेडवर्क्स से शुरू होकर झज्जर व रोहतक से होते हुए अंत में मुनक तक जाती है। बीच में यह हांसी और दिल्ली शाखा में विभाजित हो जाती है। इसमें पानी की क्षमता 3200 क्यूसेक तक है, लेकिन नहर में अधिकतर पानी 2850 क्यूसेक तक ही छोड़ा जाता है।

भालौठ सब ब्रांच नहर की बात करें तो इसमें पानी इंदिरा गांधी नहर से आता है। इंदिरा गांधी नहर की एक शाखा भालौठ सब ब्रांच है, जिसमें महीने के अंदर 8 दिन पानी आता है। नहर की क्षमता 2700 क्यूसेक है, लेकिन अभी इस नहर में पानी नहीं आ रहा।

जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ अनिल रोहिला ने बताया कि नहर में पानी की मात्रा काफी कम है। नहर में लगाया गया पाइप भी पानी में नहीं डूबा, जिसके कारण पानी जलघरों तक नहीं पहुंचा। पाइप से तीन फुट ऊपर पानी होगा तो जलघरों को भर पाएंगे। फिलहाल पानी को पंपसेट और ट्रैक्टर के माध्यम से लिफ्ट कर जलघर तक पहुंचाने का प्रयास किए जा रहे हैं।

जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ अनिल रोहिला ने बताया कि अभी वाटर स्टोरेज क्षमता कम है। जलघरों में भी गाद जमा है। तिलियार पर 15 एकड़ जमीन का मामला अभी निपट गया है। सरकार के पास फाइल भेजी हुई है। जैसे ही जमीन मिल जाएगी तो वाटर स्टोरेज टैंक बनाए जाएंगे, ताकि पानी की कमी को पूरा किया जा सके।

शहर में पानी सप्लाई के लिए 2800 क्यूसेक पानी की जरूरत है, लेकिन हमें मात्र 1200 क्यूसेक पानी ही मिला है। आधा पानी भी नहीं मिला, जिसके कारण परेशानी हो रही है। फिर भी लोगों को पानी उपलब्ध करवाने के लिए वाटर टैंकर लगा रखे है। अभी हमारे पास 8 दिन ही पानी स्टोर करने की क्षमता है। लेकिन नहर देरी से आई तो पानी को लेकर परेशानी हुई है।

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