नवदुर्गा के नौ रुपों में देवी कूष्माण्डा की पूजा नवरात्रि की चौथे दिन की जाती है। पुराणों के अनुसार देवी कूष्माण्डा की हंसी की किलकारी से इस पूरे ब्रह्माण्ड की रचना हुई है। देवी सूर्य मंडल के अंदर निवास करती हैं। इन्हीं में इतनी क्षमता है की वे अपने तेज़ को संभाल पाएं। इसी कारण देवी की आभा सूर्य जैसी चमक रही है, देवी को कुम्हड़े की बलि चढ़ाई जाती है। देवी कूष्माण्डा का ध्यान करने से सूर्य ग्रह की शुभता प्राप्त होती है। देवी का रूप अत्यंत ही निर्मल भक्त वत्सल है। देवी का पूजन करते समय निश्चल मन से देवी के चित्र का ध्यान करें, हाथों में पुष्प लेकर अपनी मनोकामना उनके आगे व्यक्त करते हुए इस मंत्र का जाप करें।

इस मंत्र का 108 बार जाप करते हुए दुर्गा स्तुति का पाठ करें। दुर्गा माता के रूप का ध्यान करने से तीनों लोक के सुख-साधन प्राप्त होते हैं। भवन निर्माण की मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती है।

मालपुए का भोजन करवाएं। ऐसे करने से देवी के अनुकंपा बनी रहेगी। धन के अभाव दूर होंगे।

देवी को दही का भोग चढ़ाने से धन-धान्य की वृद्धि रहती है।

चौथी नवरात्रि पर छोटी बच्चियों को खिलौने बांटने से सभी कार्य संपूर्ण होते हैं। जीवन में चल रही आकस्मिक बाधाएं टल जाती हैं।

देवी कुष्मांडा को प्रसन्न करने के लिए छेने से बनी मिठाई का भोग लगाना अति शुभ माना गया है।

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