हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठे सवालों के बाद सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने सरकारी कर्मचारियों को राजनीतिक गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहने के निर्देश जारी किए हैं। साफ कहा गया है कि यदि कोई कर्मचारी किसी उम्मीदवार या दल के पक्ष में प्रचार, समर्थन या सक्रिय भागीदारी करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, 13 अप्रैल को चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद 22 अप्रैल को राजनीतिक दलों के साथ हुई बैठक में यह मामला सामने आया कि कुछ स्थानों पर सरकारी कर्मचारी खुले तौर पर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होकर पक्षपात कर रहे हैं। इसे हरियाणा सिविल सेवा (सरकारी कर्मचारी आचरण) नियम, 2016 और मॉडल आचार संहिता का सीधा उल्लंघन माना गया है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार नहीं करेगा और सार्वजनिक सभाओं में उसकी मौजूदगी केवल दर्शक के रूप में और पूर्व अनुमति के साथ ही स्वीकार्य होगी। किसी एक उम्मीदवार की सभाओं में बार-बार उपस्थिति को भी पक्षपात की श्रेणी में रखा जाएगा।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रचार के दौरान यदि कोई मंत्री या राजनीतिक व्यक्ति किसी निजी कार्यक्रम में जाता है, तो सरकारी कर्मचारी उसमें शामिल नहीं होंगे। मुख्य सचिव को सभी विभागों, बोर्डों और निगमों को इस संबंध में सख्त दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

चुनाव प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आयोग ने सिंगल विंडो प्रणाली लागू की है, ताकि उम्मीदवारों को अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़े। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई अधिकारी ‘नो ड्यूज’ प्रमाण पत्र जारी करने में जानबूझकर देरी करता है, तो इसे चुनावी निर्देशों का उल्लंघन मानते हुए उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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