हरियाणा में नगर निगम चुनावों को लेकर बुधवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने हरियाणा सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया, जिसमें पंचकूला नगर निगम में अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 4 से घटाकर 3 कर दी गई थी।
कांग्रेस नेताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वार्ड निर्धारण केवल पुनर्गठित नगर निगम क्षेत्र की 2011 की जनगणना के आधार पर ही किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि फैमिली इन्फार्मेशन डेटा रिपॉजिटरी जैसे प्रशासनिक डेटाबेस को इसका आधार नहीं बनाया जा सकता।
इस फैसले के बाद पंचकूला नगर निगम चुनावों की तय समय-सीमा पर असर पड़ सकता है और चुनाव में देरी की संभावना जताई जा रही है।
दरअसल, चुनाव से पहले वार्डबंदी को लेकर पंचकूला में सियासी घमासान तेज हो गया था। कांग्रेस पार्टी ने सरकार की नई वार्डबंदी को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में म्यूनिसिपल एक्ट-1994 के नियमों की अनदेखी और वार्डों के सीमांकन में मनमानी करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
कांग्रेस नेता रविंद्र रावल ने अपनी याचिका में कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि नियमों के अनुसार किसी भी नगर निगम क्षेत्र में वार्डबंदी में बदलाव तभी किया जा सकता है, जब उसकी सीमाओं में कोई नया क्षेत्र जोड़ा या हटाया गया हो।
उन्होंने दावा किया कि पंचकूला के मामले में निगम की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं हुआ, इसके बावजूद वार्डबंदी में संशोधन कर दिया गया, जो नियमों के खिलाफ है।
कांग्रेस ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि अनुसूचित जाति (SC) की आबादी बढ़ने के बावजूद नई वार्डबंदी में एक SC वार्ड कम कर दिया गया। पार्टी ने अपनी याचिका में यह मुद्दा भी उठाया कि कुल वार्डों की संख्या में कोई बदलाव किए बिना ही SC के लिए आरक्षित एक वार्ड घटा दिया गया, जो नियमों और जनसंख्या अनुपात के खिलाफ है।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन भी किया जा चुका है। निर्धारित कार्यक्रम के तहत 28 फरवरी को वार्डवार प्रारूप मतदाता सूची जारी की गई थी।
इसके बाद आम नागरिकों से दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गईं, ताकि सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि को समय रहते सुधारा जा सके। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 7 मार्च निर्धारित की गई थी।

