हरियाणा में नियमों को ताक पर रखकर वायु और पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाले रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांटों के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने राज्य के अलग-अलग जिलों में संचालित आरएमसी प्लांटों पर कुल ₹40 करोड़ 61 लाख 93 हजार 809 का पर्यावरण मुआवजा लगाया है।
हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इतने भारी जुर्माने में से अब तक केवल ₹1 करोड़ 22 लाख 31 हजार 1 की ही वसूली हो सकी है, जबकि करीब ₹39.39 करोड़ की रिकवरी अभी भी बाकी है।
यह मामला दीपक बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य केस में एनजीटी के समक्ष दाखिल सप्लीमेंट्री रिपोर्ट में सामने आया है। इससे पहले 1 अप्रैल को एनजीटी की पीठ ने हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर नाराजगी जताई थी और पूछा था कि लगाए गए जुर्माने, वसूली और पर्यावरण सुधार कार्यों का पूरा ब्यौरा क्यों नहीं दिया गया।
इसके बाद HSPCB पानीपत के क्षेत्रीय अधिकारी भूपिंदर सिंह ने सभी 23 क्षेत्रीय कार्यालयों से आंकड़े जुटाकर नई रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश की।
रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम नॉर्थ में सबसे ज्यादा ₹25.26 करोड़ का जुर्माना लगाया गया, लेकिन केवल ₹45.05 लाख की ही रिकवरी हो सकी। वहीं गुरुग्राम साउथ में ₹13 करोड़ का जुर्माना लगाया गया, मगर अब तक एक भी रुपये की वसूली नहीं हुई।
फरीदाबाद में ₹86.58 लाख का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से ₹29.74 लाख वसूले गए हैं। पानीपत में ₹1.02 करोड़ के मुआवजे में से ₹33.30 लाख की रिकवरी हुई है। दूसरी ओर नूंह और सोनीपत ऐसे जिले रहे जहां 100 प्रतिशत जुर्माना वसूला गया।
25 मई को हुई सुनवाई में एनजीटी ने हरियाणा सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ढीली कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। ट्रिब्यूनल ने कहा कि करोड़ों रुपये का पर्यावरण मुआवजा केवल सरकारी एजेंसियों की निष्क्रियता के कारण लंबित पड़ा है।
एनजीटी ने हरियाणा सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न सरकार खुद यह पूरी बकाया राशि जमा कराए, ताकि पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई समय पर हो सके। अदालत ने कहा कि सरकार बाद में यह राशि संबंधित उद्योगों से वसूल सकती है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी, जिसमें हरियाणा सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।
