हरियाणा से पूर्व राज्यसभा सांसद और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा के पिता नंद किशोर गोयनका का सोमवार को 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई में अंतिम सांस ली। वह पिछले कई दिनों से बीमार थे। उनका पार्थिव शरीर मुंबई के मरीन ड्राइव स्थित वसंत सागर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।

मंगलवार सुबह उनका पार्थिव शरीर विशेष विमान से हिसार लाया जाएगा। इसके बाद अग्रोहा के गोयनका उद्यान में पूरे राजकीय सम्मान और सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

आदमपुर की अनाज मंडी से शुरू किया कारोबार

नंद किशोर गोयनका का जन्म 28 सितंबर 1930 को हिसार जिले के सलदपुर गांव में हुआ था। उन्होंने आदमपुर की अनाज मंडी में आढ़ती के रूप में कारोबार शुरू किया और अनाज खरीद-फरोख्त व कमीशन एजेंसी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी लंबे समय तक जुड़ाव रहा और संगठन में कई जिम्मेदारियां निभाईं।

अग्रोहा धाम के विकास में रहा बड़ा योगदान

वैश्य समाज के नेता बजरंग दास गर्ग के अनुसार, नंद किशोर गोयनका अग्रोहा धाम के प्रमुख संस्थापकों में शामिल थे। उन्होंने अग्रोहा धाम के विकास के साथ-साथ हरियाणा की कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वैश्य समाज में उन्हें संरक्षक के रूप में सम्मानित किया जाता था।

सात बच्चों का भरा-पूरा परिवार

नंद किशोर गोयनका अपने पीछे सात बच्चों का परिवार छोड़ गए हैं। उनके सबसे बड़े बेटे डॉ. सुभाष चंद्रा हैं। इसके अलावा लक्ष्मी नारायण, जवाहर और अशोक उनके बेटे हैं, जबकि कुसुम, उर्मिला और मोहिनी उनकी बेटियां हैं। परिवार के अधिकांश सदस्य दिल्ली और मुंबई में रहते हैं।

पिता से सीखा कारोबार, पढ़ाई छोड़ संभाली जिम्मेदारी

डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने पिता के मार्गदर्शन में ही कारोबार की शुरुआत की थी। परिवार के आर्थिक संकट के दौर में उन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़कर पिता के साथ व्यापार संभाल लिया। आगे चलकर उन्होंने एस्सेल ग्रुप की स्थापना की और देश के प्रमुख उद्योगपतियों में अपनी पहचान बनाई।

2016 में हरियाणा से बने थे राज्यसभा सांसद

डॉ. सुभाष चंद्रा 2016 में भाजपा के समर्थन से हरियाणा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे थे। उनका कार्यकाल 2 अगस्त 2016 से 1 अगस्त 2022 तक रहा। हालांकि वे कभी भाजपा के औपचारिक सदस्य नहीं बने। 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में उन्होंने हिसार सीट पर भाजपा प्रत्याशी कमल गुप्ता के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार सावित्री जिंदल का समर्थन किया था।

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