मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्र सरकार की मितव्ययिता नीति का असर अब राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरकारी खर्चों में कटौती की अपील के बाद हरियाणा सरकार ने भी खर्चों पर नियंत्रण के लिए कई अहम कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के विदेश दौरों पर आंशिक रोक लगाने का फैसला सामने आया है।

विदेश यात्राओं पर बढ़ी सख्ती

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार फिलहाल मंत्रियों और विभागों के पास लंबित विदेश यात्रा संबंधी प्रस्तावों पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले रही है। सरकार की ओर से इस विषय पर विस्तृत गाइडलाइन तैयार की जा रही है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद केवल बेहद जरूरी और विशेष परिस्थितियों में ही विदेश यात्रा की अनुमति दिए जाने की संभावना है।

सरकार का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अनावश्यक सरकारी खर्चों को सीमित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से विदेश दौरों की समीक्षा प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाया जा रहा है।

विपुल गोयल का जापान दौरा रद्द

नई मितव्ययिता नीति का असर शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल के प्रस्तावित जापान दौरे पर भी पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के कार्यक्रम के सिलसिले में उनका विदेश दौरा तय माना जा रहा था, लेकिन सरकारी स्तर पर खर्च नियंत्रण नीति लागू होने के बाद यह यात्रा रद्द कर दी गई।

मीडिया से बातचीत में स्वयं विपुल गोयल ने इस बात की पुष्टि की। इससे साफ संकेत मिला है कि सरकार अब विदेश यात्राओं को लेकर बेहद सतर्क रुख अपना रही है।

CM Office से जुड़े प्रस्ताव भी अटके

सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ लोगों ने भी विदेश यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन किया था। हालांकि मुख्यमंत्री नायब सैनी ने इन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी। इससे यह संकेत मिल रहा है कि सरकार इस नीति को सभी स्तरों पर समान रूप से लागू करना चाहती है।

ऊर्जा विभाग में भी नहीं मिली मंजूरी

श्रम एवं ऊर्जा मंत्री अनिल विज के विभाग में भी कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने निजी खर्च पर विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी। लेकिन विभागीय स्तर पर इन आवेदनों को फिलहाल स्वीकृति नहीं मिली है। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बताया गया है कि मुख्य सचिव कार्यालय से नई गाइडलाइन जारी होने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।

आर्थिक अनुशासन पर सरकार का फोकस

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को आर्थिक अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक हालात और संभावित आर्थिक दबावों को देखते हुए राज्य सरकारें अब गैर-जरूरी खर्चों में कटौती को प्राथमिकता दे रही हैं।

हरियाणा सरकार की यह पहल आने वाले समय में अन्य प्रशासनिक खर्चों की समीक्षा का रास्ता भी खोल सकती है। माना जा रहा है कि नई गाइडलाइन जारी होने के बाद विदेश यात्राओं की स्वीकृति प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक कठोर हो जाएगी।

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