झारखंड की राजधानी रांची से निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। लातेहार निवासी 18 वर्षीय राजू कुमार रंजन सड़क दुर्घटना में पैर टूटने के बाद रांची के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार इलाज के दौरान उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और करीब 40 दिनों तक चले उपचार के बाद उसकी मौत हो गई।मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को लगभग 22 लाख रुपये का बिल थमा दिया। परिजनों का आरोप है कि भर्ती के बाद मरीज की समय पर ड्रेसिंग नहीं की गई, जिससे संक्रमण बढ़ता गया और पूरे शरीर में फैल गया। उनका कहना है कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद डॉक्टर मरीज की जान नहीं बचा सके।युवक की मौत के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया तथा अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। परिजनों के दबाव के बाद शव का पोस्टमार्टम रिम्स में कराया गया, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के उपायुक्त को तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके बाद रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने सिविल सर्जन को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है और जिला स्तरीय जांच टीम गठित कर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत इलाज में लापरवाही के कारण हुई या अन्य चिकित्सकीय कारण जिम्मेदार थे। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो अस्पताल प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
