रोहतक में दूसरी कक्षा के विद्यार्थी लव्यांश का अपहरण करने के मामले में बच्चे के पिता मनोज धनखड़ ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उन पर लगा अपहरण का आरोप झूठा है और यह उनकी पत्नी निहारिका व ससुर का षड्यंत्र बताया। वह कोर्ट के आदेशों पर अपने बेटे लव्यांश से मिलने स्कूल गया था। वहीं बेटे के कहने पर उसके साथ घूमने के लिए नैनीताल गए थे। लेकिन पीछे से उसकी पत्नी व ससुर ने षड्यंत्र रचकर छवि खराब करने के लिए अपहरण करने का झूठा आरोप लगा दिया।

मनोज धनखड़ ने कहा कि वह और निहारिका एक ही स्कूल के सहपाठी थे और उन्होंने 2012 प्रेम-विवाह किया था। 2016 में लव्यांश का जन्म हुआ। शादी के बाद निहारिका अभी भी पढ़ाई करना चाहती थी। उसके पिता सुरेन्द्र दांगी के कहने पर निहारिका के विदेश में पढ़ने के लिए पुश्तैनी जमीन बेचकर 40 लाख रुपयों का इंतजाम करके दिया। लेकिन उसके ससुर ने सारे रुपये अपने पास रख लिए।

मनोज ने कहा कि निहारिका मेरे बेटे के साथ अपने मायके चली गई और बाप के कहने पर तलाक का केस कर दिया। जोकि अभी भी अदालत में लंबित है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने प्रत्येक शनिवार व रविवार बच्चे से मिलने और घर पर लाने का आदेश दिया था। लेकिन उसकी पत्नी बहाना बनाकर बच्चे से मिलने नहीं देती।

मनोज धनखड़ ने कहा कि उसका बेटा लव्यांश भी उसके साथ ही रहना चाहता है। अदालत में भी बच्चे ने उसके साथ रहने की इच्छा जताई। जिस पर न्यायाधीश ने अपहरण के केस में जमानत दे दी। उन्होंने कहा कि उसकी पत्नी आयरलैंड में रहती है, इसलिए उसने बेटे की कस्टडी भी मांगी। लेकिन उसकी पत्नी व ससुर जानबूझकर फंसाने व छवि खराब करने के लिए बार-बार झूठी शिकायत दे रहे हैं।

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