भारत की महिलाएं हर किसी क्षेत्र में नाम ऊंचा कर रही हैं। राजनीति से लेकर औद्योगिक क्षेत्र, कला क्षेत्र, खेल जगत हर जगह एक मुख्य भूमिका अदा कर रही हैं। इतिहास में कुछ महिलाएं ऐसी थी जिन्होंने आज की महिलाओं को आगे बढ़ने की हिम्मत दी। उन्हीं महिलाओं में से एक कल्पना चावला थी। कल्पना चावला भारत की पहली महिला था जिन्होंने अंतरिक्ष का सफर तय किया था। उनकी इस उपलब्धि ने महिलाओं का हौंसला बढ़ाने के साथ-साथ पूरे देश का नाम गर्व से ऊंचा किया। आज यानी 1 फरवरी को कल्पना चावला की पुण्यतिथि है तो चलिए आपको बताते हैं कि कैसे उन्होंने अपने सपने को पूरा करके अंतरिक्ष का सफर तय किया….

कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल में 17 मार्च 1962 को हुआ था। उनके पिता का नाम बनारसी लाल चावला और माता का संज्योति चावला था। कल्पना सबसे छोटी थी, उनकी शुरुआत शिक्षा करनाल में ही टैगोर बाल निकेतन सीनियर सैकेंडरी स्कूल में हुई थी। शुरुआत से ही कल्पना चावला का फेवरेट विषय विज्ञान रहा था। वह एक फ्लाइट इंजीनियर बनना चाहती थी। अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने पंजाब के इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया और एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। डिग्री के दौरान उन्हें कई तरह की नौकरी के ऑफर भी मिले। लेकिन अपनी आगे की पढ़ाई पूरा करने के लिए वह अमेरिका में चली गई थी। 

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में कल्पना चावला ने अपने आगे की पढ़ाई जारी की। दो साल पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। साल 1986 में उन्होंने इसी विषय में  मास्टर्स की डिग्री हासिल की और बाद में साल 1998 में उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी कर ली। पीएचडी के दौरान ही कल्पना चावला ने तय कर लिया था कि वह अंतरिक्ष पर जाना चाहती हैं। उनके पास कमर्शियल पायलट का लाइसेंस भी था। साथ ही कल्पना सर्टिफाइड फ्लाइट इंस्ट्रक्टर बन चुकी थी। इस दौरान उन्होंने फ्रांस के जान पियरे से शादी कर ली जो खुद एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर थे। 

साल 1993 में कल्पना ने पहली बार नासा के लिए अप्लाई किया था लेकिन नासा ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया। जिसके बाद 1995 में कल्पना का एक अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चुन लिया गया था साथ ही में उनकी ट्रेनिंग भी शुरु हो गई। 1998 में कल्पना चावला ने अंतरिक्ष की पहली उड़ान भरी। अंतरिक्ष यात्रा के दौरान कल्पना चावला ने 372 घंटे बिताते हुए इतिहास के पन्नों पर अपना नाम लिख लिया और  साथ में पूरे भारत का भी मान बढ़ाया। 

पहली उड़ान सफल होने के बाद साल 2000 में दूसरी स्पेस यात्रा के लिए भी कल्पना चावला को चुना गया था लेकिन मिशन तीन साल की देरी से हुआ और 2003 में इसे लांच किया गया था। 16 जनवरी 2003 को कल्पना ने कोलंबिया फ्लाइट STS 107 से उड़ान भरी परंतु 1 फरवरी 2003 को कल्पना का अंतरिक्ष यान पृथ्वी की कक्ष में प्रवेश करते ही टूट गया। जिसके कारण कल्पना चावला और उनके साथ मिशन में मौजूद 7 लोगों की मौत हो गई थी। 

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