नाग पंचमी के दिन नाग पूजा का महत्व है। यह दिन काल सर्प दोष को दूर करने के लिए उत्तम है।नाग पंचमी का पर्व 2 अगस्त, मंगलवार को है। इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र होने से धाता योग बन रहा है। साथ ही शिव योग भी है। धाता और शिव योग में नाग पूजन व दर्शन बहुत दुर्लभ माना गया है। हिंदू धर्म में नाग पूजा सृष्टि के आरंभ से प्रचलित है। महाभारत काल में पांडवों की माता कुंती नागकन्या थी। दुर्योधन ने भीम को मारने के लिए विषैली खीर खिलाकर गंगा में छोड़ दिया था। लेकिन नाग देवता ने विष सोखकर उनकी रक्षा की थी। उन्हें 10 हजार हाथियों के बल का वरदान भी दिया था। नाग हमारी संस्कृति का प्रमुख अंग है। उन्हें किसानों का मित्र माना जाता है। वे जंगल व खेतों में हानि पहुंचाने वाले जंतुओं से कृषकों की सहायता करते हैं। सर्प को दूध पिलाने की परंपरा प्राचीन काल से है। नाग को पितर व देवता का प्रतीक माना जाता है।
क्या है कालसर्प दोष?
जन्म कुंडली में अगर राहु और केतु के मध्य समस्त ग्रह आ जाएं तो कालसर्प दोष बनता है। इस दोष से पीड़ित जातक समाज में उचित स्थान प्राप्त नहीं कर पाता। काम अटक जाते हैं। योग्यता होने के बावजूद उचित स्थान प्राप्त नहीं होता। यह एक प्रकार का शाप होता है। जो सांप को मारना, पेड़ कटवाना, गरीबों को सताने से व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प योग बनता है। जिसका भुगतान व्यक्ति को किसी न किसी रूप में करना पड़ता है।
कालसर्प दोष के उपाय:
- नाग-नागिन का चांदी जोड़ा बनवाकर पूजन कर जल में बहाएं।
- नारियल पर नाग-नागिन का जोड़ा बनाकर मौली से लपेटकर जल में बहाएं।
- सपेरे से नाग या जोड़ा लेकर जंगल में स्वतंत्र करें।
- किसी शिव मंदिर में प्रतिष्ठा करवाकर नाग चढ़ाएं।
- चंदन की लकड़ी के बन सात मौली बुधवार या शनिवार शिव मंदिर में चढ़ाएं।
- ऊँ नमः शिवाय व महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- सर्प गायत्री का जाप करने से कालसर्प दोष से राहत मिलती है। सर्प मंत्र इस प्रकार है-
- ऊँ नवकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि। तन्नो सर्पः प्रचोदयात्।
- ऊँ नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवी मनु।
- येन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः।
- ऊँ कुरु कुल्येहुफट् स्वाहा।
- महादेव का अर्क, धतूर, भांग और दूध से रुद्राभिषेक करवाएं।
आचार्य पवन तिवारी
संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिष सेवा संस्थान
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