हरियाणा कांग्रेस के नए प्रभारी संजय दत्त की पहली बैठक के बाद पार्टी के भीतर नया विवाद खड़ा हो गया है। सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई बैठक के दौरान मंच पर नेताओं की बैठने की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने कांग्रेस को कमजोर किया, उन्हें मंच पर आगे बैठाया गया, जबकि पार्टी के विधायकों को पीछे की कतार में जगह दी गई।
शनिवार को सिरसा में मीडिया से बातचीत के दौरान गोकुल सेतिया ने बताया कि मंच पर सबसे आगे पार्टी पदाधिकारियों और हाल ही में नियुक्त नेताओं की कुर्सियां थीं, जबकि उनके, गुहला-चीका के विधायक देवेंद्र हंस और विधायक विकास सहारण के नाम पीछे की कुर्सियों पर लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि तीनों ने नाम वाली पर्चियां फाड़ दीं और आगे जाकर बैठ गए। बाद में अन्य विधायकों से भी कहा कि वे अपनी पर्चियां हटाकर आगे बैठें।
सेतिया ने कहा कि जब शुरुआत ही गलत तरीके से होगी तो संगठन मजबूत नहीं हो सकता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 37 विधायक जीते थे, लेकिन राज्यसभा चुनाव के बाद चार-पांच विधायक पार्टी छोड़ गए। अब 32 विधायक भी नहीं संभल रहे हैं, तो अगर 45 विधायक होते तो पता नहीं क्या स्थिति होती।
बिना नाम लिए उन्होंने पूर्व सांसद अशोक तंवर पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ नेता समय से पहले मंच पर जाकर आगे बैठ गए। बाद में उन्हीं लोगों को माइक देकर अनुशासन का पाठ पढ़वाया गया, जबकि यही नेता पहले कांग्रेस छोड़कर टीएमसी, बसपा और भाजपा में गए और चुनाव के समय फिर कांग्रेस में लौट आए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों ने सिरसा में कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया।
सेतिया ने कहा कि पार्टी के खिलाफ काम करने वाले नेताओं को सम्मान दिया जा रहा है, जबकि वर्षों तक पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जिन कार्यकर्ताओं ने 2009 में कुछ नेताओं को सांसद बनाया, बाद में उन्हीं कार्यकर्ताओं का अपमान किया गया।
उन्होंने कहा कि चाहे भरत सिंह बैनीवाल हों, चौधरी रणजीत सिंह, डॉ. केवी सिंह या शीशपाल कहरवाला, कई वरिष्ठ नेताओं के साथ इन लोगों के संबंध अच्छे नहीं रहे। ऐसे नेताओं को मंच पर आगे बैठाकर पार्टी क्या संदेश देना चाहती है? अगर शुरुआत ही गलत होगी तो उसके खिलाफ आवाज उठाना पार्टी हित में जरूरी है।
सेतिया ने बिना नाम लिए पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग पहले किसानों के खिलाफ खड़े रहे, वे आज कांग्रेस नेताओं को पार्टी चलाने का ज्ञान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी में अपनी बात रखने से कोई नहीं रोक सकता। पार्टी कार्रवाई करे या न करे, वे पार्टी हित में अपनी बात आगे भी रखते रहेंगे।
इस बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच हुई हल्की नोकझोंक भी चर्चा में रही। बैठक शुरू होने से पहले हुड्डा ने मुस्कुराते हुए कहा, “सुरजेवाला, मेरा साथ दो… सरकार लेकर आएंगे।” इस पर सुरजेवाला ने भी मुस्कुराकर जवाब दिया, “20 साल से आपका ही साथ दे रहा हूं, अब आपकी बारी है।”
