रोहतक पीजीआई के कर्मचारी ने 22 फरवरी 2023 को उसने एसबीआई बैंक में एजेंट के माध्यम से 1.5 लाख रुपये सालाना प्रीमियम वाली 5 साल के लिए स्मार्ट वेल्थ बिल्डर पॉलिसी ली थी। जिसके दस्तावेज डाक से घर आए थे।

12 जून 2024 को एक कॉल आई। जिसने खुद को बैंक के कस्टमर केयर का कर्मचारी बताया। जिसने बताया कि आपकी पॉलिसी घाटे में जा रही है। एजेंट को ज्यादा कमीशन मिल रहा है। उसने मुझे कस्टमर फ्रेंडली बनाने का लालच दिया। उसके जाल में फंसकर मैंने अपनी शिकायत दर्ज कराई। जिसका नंबर भी दिया।

उसने बताया कि 13 जून को उसके पास एक कॉल आया। जिसने शिकायत व नंबर के बारे में पूछा। बताते ही कहा कि इस पॉलिसी पर थर्ड पार्टी एजेंट कोड लगा हुआ है। पॉलिसी घाटे में होने की बात कही और पैसे की भी कोई गारंटी नहीं होने की बात कही।

उन्होंने घाटे की भरपाई के लिए कहा कि 3 लाख की एफडी करवा लें, जिसके एक साल बाद 4-5 लाख मिलेंगे। जिसके बाद उसने एक पॉलिसी की, जिसके दस्तावेज वाट्सअप पर 28 जून को मिले। जिसके बाद 10 नवंबर को फिर एक कॉल आई। जिसने कहा कि आपकी पॉलिसी अभी बंद नहीं हुई, क्योंकि दस्तावेज जमा नहीं करवाए।

उसने बताया कि 7 दिसंबर को उसके पास एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने कहा कि आपकी 6 लाख 41 हजार 65 रुपए राशि पर कुछ जीएसटी लगा है। जिसके लिए एनओसी या कोई अन्य दस्तावेज लेना होगा। नहीं तो 1 लाख 15 हजार 391 रुपए टैक्स लगेंगे।

उन्होंने कहा कि वह अपनी पत्नी के नाम से पॉलिसी ले ले। इसलिए उनके दिए हुए लिंक पर 1 लाख 15 हजार 391 रुपए भेज दिए। इसके बाद उसकी पत्नी के नाम पॉलिसी कर दी। 14 दिसंबर को फिर कॉल आई, सामने वाले ने उसके पैसे रिलीज करने के लिए 36400 रुपए जमा करवाने के लिए कहा। 16 दिसंबर को कॉल आई, सामने वाले ने फंड रिलीज करने के लिए 88 हजार 750 रुपए जमा करवाने के लिए कहा।

17 दिसंबर को उसके वाट्सअप नंबर पर एक पत्र भेजकर कहा कि आपका 14 लाख 86 हजार 890 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट तैयार है। इसके लिए 1 लाख 52 हजार 400 रुपए भेजने पड़ेंगे। 18 दिसंबर को कॉल आई और टैक्स फंड के नाम पर 2 लाख 46 हजार रुपए की मांग की।

20 दिसंबर को कॉल करके फूड स्टेट कोड चार्ज के नाम से 2 लाख 52 हजार 289 रुपए रुपए का दस्तावेज भेजा और पेमेंट करने के लिए कहा। इसके बाद शक हुआ तो अपने स्तर पर जांच पड़ताल की। पता चला कि उनके द्वारा भेजे गए दस्तावेज फर्जी थे और उसके साथ कुल 5 लाख 23 हजार 550 रुपए की धोखाधड़ी की गई है। जिसकी शिकायत पुलिस को दे दी। पुलिस ने केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी।

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