उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वाले सोनीपत जिले के गांव महीपुर निवासी 23 वर्षीय भविष्य शर्मा का मंगलवार को पैतृक गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। बेटे का शव घर पहुंचते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। मां सोनिया, पिता नरेंद्र शर्मा और बहन त्रिशा का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और दोस्त शामिल हुए।

आखिरी वीडियो कॉल में मां से लगाई थी बचाने की गुहार

मृतक की मां सोनिया ने बताया कि सोमवार दोपहर करीब 2:32 बजे भविष्य का वीडियो कॉल आया था। फोन पर केवल धुआं दिखाई दे रहा था और भविष्य लगातार “मम्मी-मम्मी” कहकर मदद की गुहार लगा रहा था।

सोनिया के अनुसार, जब उन्होंने बेटे से पूछा कि क्या हुआ है तो उसने बताया कि बिल्डिंग में आग लग गई है। मां ने उसे किसी तरह बाहर निकलने या ऊपर से कूदने की सलाह दी, लेकिन भविष्य ने जवाब दिया कि “मम्मी, यहां सब मरने लग रहे हैं, बचना मुश्किल है।”

मां ने बताया कि आखिरी समय तक बेटा उनसे कहता रहा, “मम्मी बचा ले… बचा ले…” और फिर अचानक फोन बंद हो गया। कुछ घंटों बाद बेटे की मौत की सूचना मिली।

घर का इकलौता बेटा था भविष्य

परिवार के अनुसार, भविष्य शर्मा घर का इकलौता बेटा था। उसकी एक बहन त्रिशा है। वह परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बहन की शादी अच्छे तरीके से करने का सपना देख रहा था। इसी उद्देश्य से वह नौकरी करने लखनऊ गया था।

मां सोनिया ने कहा कि यदि उन्हें अंदाजा होता कि बेटा वापस जीवित नहीं लौटेगा तो वह उसे कभी इतनी दूर नौकरी करने नहीं भेजतीं।

5 जून को मिला था पहला जॉब लेटर

भविष्य के पिता नरेंद्र शर्मा ने बताया कि वह पिछले 25 वर्षों से एक निजी स्कूल में हिंदी शिक्षक हैं, जबकि उनकी पत्नी घर पर सिलाई का काम करती हैं।

उन्होंने बताया कि 5 जून को भविष्य को नौकरी का जॉइनिंग लेटर मिला था। उस दिन उसने फोन कर कहा था कि घर आने पर एक खुशखबरी सुनानी है। रात को उसने बताया कि उसकी पहली नौकरी लग गई है और उसे कंप्यूटर व आईफोन की जरूरत है।

बेटे के सपनों के लिए बेच दी थी लाइब्रेरी

पिता नरेंद्र शर्मा ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने बेटे के सपनों को पूरा करने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने खरखौदा स्थित अपनी “ग्लोरिया लाइब्रेरी” बेच दी।

लाइब्रेरी बेचकर मिले पैसों से उन्होंने करीब ढाई लाख रुपये का कंप्यूटर और एक आईफोन खरीदा। भविष्य को जूनियर आर्टिस्ट के पद पर नौकरी मिली थी, जहां उसे 25 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलने वाला था।

विदेश जाकर पढ़ाई करना चाहता था भविष्य

परिजनों के अनुसार भविष्य ने पिछले वर्ष रोहतक स्थित सुपवा (SUPVA) से बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स की डिग्री पूरी की थी। वह आगे पीजी की तैयारी कर रहा था और जापानी भाषा भी सीख रहा था।

उसका सपना विदेश जाकर एडवांस टेक्नोलॉजी से जुड़े कोर्स करना था। इसके लिए वह ऑनलाइन कोचिंग भी ले रहा था, जिस पर हर महीने 12 से 15 हजार रुपये तक खर्च होता था। परिवार उसकी पढ़ाई के लिए पहले ही करीब एक बीघा जमीन बेच चुका था।

पिता ने भावुक होकर कहा, “मैंने सिर्फ बेटा नहीं खोया, अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा खो दिया है।”

दोस्तों ने सुनाई मौत की दर्दनाक कहानी

भविष्य के चाचा रजनीश शर्मा ने बताया कि वह ऑफिस से करीब 300 मीटर दूर आलीबाग क्षेत्र में किराए के कमरे में तीन दोस्तों के साथ रहता था।

जब परिजन उसका सामान लेने लखनऊ पहुंचे तो उसके दोस्त सामान से लिपटकर रोने लगे। दोनों रूममेट्स ने बताया कि हादसे के दौरान वे भी उसी बिल्डिंग में फंसे हुए थे। एक युवक ने नीचे कूदकर अपनी जान बचाई, जबकि दूसरे ने बिना करंट वाले बिजली के तार के सहारे नीचे उतरकर खुद को बचाया।

दोनों दोस्तों ने भविष्य को आवाजें लगाईं, लेकिन तब तक पूरी बिल्डिंग धुएं से भर चुकी थी और वह बाहर नहीं निकल सका।

आग से नहीं, दम घुटने से हुई मौत

चाचा रजनीश के अनुसार आग बिल्डिंग की पहली मंजिल पर लगी थी, जबकि दूसरी मंजिल पर कई युवक फंसे हुए थे। किसी भी मृतक के शरीर पर जलने के निशान नहीं मिले।

उन्होंने बताया कि सभी की मौत आग की लपटों से नहीं बल्कि धुएं और दम घुटने के कारण हुई। भविष्य भी आखिरी समय तक मां से फोन पर बात करते हुए अपनी मौत को सामने देख रहा था।

मुख्यमंत्री योगी भी पहुंचे थे घटनास्थल

परिजनों ने बताया कि हादसे की सूचना मिलने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath अलीगढ़ से सीधे लखनऊ पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य चलाया गया तथा पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया गया।

गांव पहुंचा शव तो नम हो गईं आंखें

मंगलवार सुबह करीब 3:20 बजे परिजन लखनऊ से भविष्य का शव लेकर रवाना हुए और लगभग 10 घंटे बाद गांव महीपुर पहुंचे। शव के गांव पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े।

भविष्य के साथ पढ़ाई करने वाले साथी और मित्र भी अंतिम विदाई देने पहुंचे। सभी ने घटना को गंभीर लापरवाही का परिणाम बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

परिजनों की मांग

परिवार और दोस्तों का कहना है कि यदि संस्थान और भवन संचालक सुरक्षा मानकों का पालन करते तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। उन्होंने मांग की कि सुरक्षा में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ हत्या जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।

23 वर्षीय भविष्य शर्मा के सपने, परिवार की उम्मीदें और संघर्ष की कहानी लखनऊ अग्निकांड की सबसे दर्दनाक तस्वीर बनकर सामने आई है। एक ऐसा बेटा, जो परिवार का सहारा बनने निकला था, लेकिन कुछ ही दिनों में उसकी अर्थी घर लौट आई।

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