एनीमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन (Hb) का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) में पाया जाता है और इसका काम शरीर के सभी हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाना होता है। जब इसकी कमी हो जाती है, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। ये समस्या गर्भवती महिलाओं में आम होती जा रही है। क्योंकि गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जब महिला के शरीर में कई बदलाव होते हैं। इस दौरान खून की मात्रा बढ़ जाती है और शरीर को ज्यादा पोषण की जरूरत होती है। अगर इस समय शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाए, तो इसे एनीमिया कहा जाता है। अगर ये समस्या किसी महिला को प्रेग्नेंसी के दौरान हो जाती है तो उसका सही समय पर इलाज कराना जरूरी है, नहीं तो ये खतरनाक साबित हो सकता है।

यहां सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि प्रेग्नेंसी में एनीमिया क्यों होता है, कब खतरनाक होता है? महिलाओं का ये समझना जरूरी है कि इससे बच्चे और मां की सेहत पर क्या असर होगा, इसे बचाव कैसे कर सकते है? आज हम आपको इस लेख में बताएंगे कि एक्सपर्ट का इस बारे क्या कहना है। चलिए इस बारे विस्तार से जानते हैं…

गर्भावस्था में शरीर को अधिक आयरन की जरूरत होती है, क्योंकि खून की मात्रा बढ़ती है। अगर डाइट में आयरन कम हो, तो एनीमिया हो जाता है। इसके अलावा इस समस्या के होने का कारण है, फोलिक एसिड और विटामिन B12 की कमी। ये दोनों पोषक तत्व खून बनाने में मदद करते हैं। इनकी कमी से भी एनीमिया हो सकता है। बार-बार प्रेग्नेंसी भी इसका एक कारण है। अगर दो प्रेग्नेंसी के बीच सही गैप न हो, तो शरीर को रिकवर होने का समय नहीं मिलता और एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है। पहले से खून की कमी होना भी इस समस्या का हो जाना एक बड़ा कारण है। अगर महिला पहले से ही एनीमिक है, तो प्रेग्नेंसी में यह समस्या और बढ़ सकती है।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की मानें गर्भावस्था के दौरान एनीमिया को अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है। क्योंकि गर्भावस्था में महिला को ब्लड वॉल्यूम बनाए रखने के लिए सामान्य से अधिक आयरन की आवश्यकता होती है। इसकी कमी की वजह से समय से पहले प्रसव और जन्म के समय शिशु का वजन सामान्य से कम हो सकता है जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं। जब हीमोग्लोबिन का स्तर बहुत कम हो जाता है, तब यह स्थिति गंभीर मानी जाती है। जैसे- माइल्ड एनीमिया 10–11 g/dl, मॉडरेट एनीमिया 7–10 g/dl, सीवियर एनीमिया 7 g/dl से कम (खतरनाक)। इससे सीवियर एनीमिया सबसे खतरनाक स्थिति होती है। सीवियर एनीमिया में तुरंत डॉक्टर की देखरेख जरूरी होती है, क्योंकि इससे जान का खतरा भी हो सकता है।

अत्यधिक कमजोरी और थकान
चक्कर आना और सांस फूलना
दिल की धड़कन तेज होना
इम्यूनिटी कमजोर होना
डिलीवरी के समय ज्यादा खून बहने का खतरा
गंभीर मामलों में हार्ट पर दबाव

कम वजन (Low Birth Weight) के साथ जन्म
समय से पहले जन्म (Premature Birth)
बच्चे के दिमागी विकास पर असर
जन्म के बाद बच्चे में भी एनीमिया होने का खतरा
गंभीर मामलों में गर्भ में ही बच्चे की मृत्यु का खतरा

आयरन और फोलिक एसिड से भरपूर आहार लें (हरी सब्जियां, दाल, चुकंदर, अनार)
डॉक्टर द्वारा दी गई आयरन सप्लीमेंट्स नियमित लें
विटामिन C (नींबू, संतरा) का सेवन बढ़ाएं, इससे आयरन बेहतर अवशोषित होता है
चाय-कॉफी का सेवन कम करें (ये आयरन के अवशोषण को रोकते हैं)
नियमित चेकअप और ब्लड टेस्ट करवाएं

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