रोहतक, 6 नवंबर। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि केंद्रीय गृहमंत्री को अपने हरियाणा दौरे के दौरान कानून-व्यवस्था पर बात करनी चाहिए थी। क्योंकि स्वयं केंद्र सरकार का सामाजिक प्रगति सूचकांक हरियाणा को देश का सबसे असुरक्षित राज्य बता रहा है। केंद्र सरकार द्वारा जारी एनसीआरबी के आँकड़े बताते हैं कि हरियाणा रेप, मर्डर, अपहरण, फिरौती और फायरिंग जैसे मामलों में शीर्ष राज्यों में है। इन मुद्दों पर बात करने के बजाय केंद्र सरकार के नुमाइंदे इधर-उधर की बातें करते हैं। क्योंकि भाजपा के पास 12 साल सरकार चलाने के बावजूद प्रदेश में बताने लायक एक भी उपलब्धि नहीं है।
हुड्डा ने कहा कि सरकार द्वारा विपक्ष के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करना हास्यास्पद है। देश के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि सत्ता पक्ष खुद विपक्ष के खिलाफ सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन कर रहा है। यह तो “उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे” वाली बात है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अब तक जो बात सिर्फ विपक्ष कहता था—कि लोकतंत्र खतरे में है, लोकतंत्र को बचाओ—वही बात अब भाजपा भी कह रही है। यानी लोकतंत्र सचमुच खतरे में है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हरियाणा निर्माण के 60 वर्ष पूरे हो चुके हैं। आज सत्ता में बैठे लोगों को आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है, क्योंकि प्रदेश के सामने कई चुनौतियाँ हैं। प्रदेश में करीब 80 अपराधी गैंग सक्रिय हैं। फिस्कल हेल्थ के मामले में हरियाणा 14वें स्थान पर खिसक गया है। कर्ज लेने के मामले में 15वें स्थान पर तथा सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स में 11वें स्थान पर पहुँच गया है। बेरोजगारी के मुद्दे पर भी गंभीर आत्ममंथन जरूरी है।
हुड्डा ने बताया कि उन्होंने ये बातें हरियाणा विधानसभा द्वारा आयोजित संविधान पखवाड़ा के तहत हुए जनप्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित करते हुए भी कही थीं।
उन्होंने कहा कि हरियाणा का बड़ा गौरवशाली इतिहास रहा है। वर्ष 1966 में जब हरियाणा का गठन हुआ, तब प्रदेश आर्थिक, औद्योगिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ था तथा प्रति व्यक्ति आय मात्र लगभग 540 रुपये थी। उस समय कई सवाल उठ रहे थे कि हरियाणा आर्थिक तौर पर कभी सक्षम बन पाएगा या नहीं।
लेकिन हरियाणा ने इसके बाद खूब तरक्की की। कांग्रेस को जब 2005 में मौका मिला तो हमारी सरकार ने पंचकूला में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, कुरुक्षेत्र में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, करनाल में कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज, सोनीपत में भगत फूल सिंह यूनिवर्सिटी फॉर विमेन, मेडिकल कॉलेज, आईआईटी एक्सटेंशन सेंटर, आईआईआईटी, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, राजीव गांधी एजुकेशन सिटी, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, डीसीआर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, रोहतक में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, विजुअल एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स यूनिवर्सिटी, फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, झज्जर में ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट, जींद में चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी, महिला कॉलेज और भिवानी में चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी बनवाई। सिरसा में चौधरी देवी लाल के नाम पर बने दो कमरों की यूनिवर्सिटी को पूरी यूनिवर्सिटी बनाया।
इसी तरह हिसार में लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम में इंडियन डिफेंस यूनिवर्सिटी, महेंद्रगढ़ में सेंट्रल यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद में मेडिकल कॉलेज, वाईएमसीए यूनिवर्सिटी, मेवात में हसन खां मेवाती मेडिकल कॉलेज, रेवाड़ी में इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी मीरपुर, सैनिक स्कूल, राव बिरेंदर सिंह इंजीनियरिंग कॉलेज और झज्जर में न्यूक्लियर एनर्जी स्टडी सेंटर की स्थापना हुई।
कांग्रेस के कार्यकाल में 4 थर्मल पावर प्लांट और 1 न्यूक्लियर पावर प्लांट जैसी देश की सबसे बड़ी परियोजनाएँ आईं।
लेकिन भाजपा के पूरे कार्यकाल में न कोई संस्थान हरियाणा में बना और न ही कोई बड़ी परियोजना स्थापित हुई।
यहाँ तक कि भाजपा ने अग्निवीर जैसी योजना लागू करके हरियाणा को नुकसान ही पहुँचाया। क्योंकि इस योजना से पहले हरियाणा से हर साल 5,500 युवा सेना में भर्ती होते थे। लेकिन अग्निवीर लागू होने के बाद यह आँकड़ा 950 तक सिमट गया है। अग्निवीरों को बिना कोई शर्त थोपे सीधे तौर पर पक्का किया जाना चाहिए। सिर्फ दो साल का सेवा विस्तार देना अग्निवीरों के सम्मान के साथ खिलवाड़ है।
कांग्रेस पहले दिन से ही अग्निवीर योजना का विरोध कर रही थी। हमारा स्पष्ट मत था कि यह योजना न तो देश के हित में है और न ही सेना के हित में। यहाँ तक कि सेना के कई पूर्व अधिकारी भी इसके खिलाफ खुलकर बोल रहे थे। अब आखिरकार सरकार को भी यह बात माननी पड़ी है और उसने जबरदस्त विरोध के बाद योजना में कुछ नए प्रावधान जोड़ने की घोषणा की है।
जिस तरह सरकार अग्निवीरों को मात्र दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार दे रही है और उसके बाद उन्हें नियमित करने के लिए शर्तें लगा रही है, यह सही नहीं है। जो युवा छह साल तक सेना में सेवा दे रहा है, उसके लिए और अतिरिक्त मानदंड क्या रह जाते हैं? यह तो स्पष्ट है कि वह सेना में नियमित रूप से सेवा देने के लिए पूरी तरह तैयार है। तो क्यों नहीं इन्हें पहले की तरह नियमित सैनिक के रूप में भर्ती किया जा रहा है?
सेना में जाने वाले हर जवान को पूरा कार्यकाल, पक्की नौकरी, तमाम वेतन, भत्ते, सुविधाएँ और पेंशन दी जानी चाहिए।
इस मौके पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तमाम प्रदेशवासियों और पत्रकारों को दीवाली की शुभकामनाएँ भी दीं।
