पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब नेशनल बैंक व अन्य वित्तीय संस्थाओं के लोन रिकवरी मामलों में जिला प्रशासन की सुस्ती पर कड़ा ऐतराज जताया है। उज्जजीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पानीपत DC और SP को सख्त निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने 30 दिनों के भीतर बैंक को उसकी बंधक संपत्ति का भौतिक कब्जा दिलाने के आदेश जारी किए हैं।
जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जिला मजिस्ट्रेट द्वारा 17 दिसंबर 2025 को सरफेसी एक्ट की धारा 14 के तहत आदेश जारी किए जाने के बावजूद बैंक को कब्जा न दिलाना काफी हैरान करने वाला है।
अधिकारियों द्वारा अपनी वैधानिक जिम्मेदारी न निभाना लापरवाही को दर्शाता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बैंकिंग व्यवस्था और देश के खजाने पर भारी बोझ हैं। सरफेसी एक्ट के तहत रिकवरी प्रक्रिया में तेजी लाना सिस्टम में नकदी बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
हाईकोर्ट ने रिट ऑफ मंडामस जारी करते हुए जिला मजिस्ट्रेट प्रतिवादी, डिप्टी कमिश्नर और एसपी पानीपत को आदेश दिए कि वे बैंक को तुरंत पुलिस सहायता और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग प्रदान करें। आदेश के अनुसार, 30 दिनों के भीतर संपत्ति का भौतिक कब्जा बैंक को सौंपा जाए, ताकि बैंक नियमानुसार अपनी बकाया राशि की वसूली कर सके।
साथ ही हाईकोर्ट ने अधिकारियों को 45 दिनों के भीतर इस आदेश की अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

