आज देश के लोगों की सोच बदल रही है। 21वीं सदी में लोग अपने रुढ़िवादी विचारों को पीछे छोड़ नई पीढ़ी के नियमों को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। नई पहल और रीति-रिवाजों के जरिए समाज की पिछड़ी बातों को तोड़ रहे हैं। कुछ ऐसा ही मुद्दा इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी छाया है। यह मामला उत्तराखंड के उधमसिंह नगर में रहने वाले परिवार का है। इस परिवार ने बेटी के पहले पीरियड्स यानी की मासिक धर्म आने पर जश्न मनाया है। हालांकि दक्षिण भारत में यह रिवाज काफी पुराना है लेकिन उत्तर भारत में जितेंद्र भट्ट नाम के व्यक्ति ने अपनी बेटी के पीरियड्स का जश्न मनाकर एक नई पहल की शुरुआत की है। 

इस नई पहल के साथ जितेंद्र ने पूरी दुनिया को एक सीख दी है। पुराने समय में तो लोग मासिक धर्म को लेकर कोई बात भी नहीं करते थे। इन दिनों में लड़कियों पर कई तरह की बंदिशें लग जाती थी। परंतु अब 21वीं सदी में इस पहल के साथ उन्होंने देश को इस पर अपनी सोच बदलने पर मजबूर कर दिया है।

इस परिवार ने बेटी रागिनी के पहले पीरियड्स आने पर बहुत ही अच्छा जश्न मनाया। आपको बता दें कि रागिनी की पिता एक संगीत शिक्षक है उन्होंने इस बारे में बात करते हुए बताया कि जब वह छोटे थे तो उन्हें इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। जब उन्हें इस बात का पता चला तो उन्होंने देखा कि जब बच्ची या फिर किसी महिला के पीरियड्स होते थे तो उन्हें बड़ी ही अलग नजर ने देखा जाता था। इन दिनों में उन्हें किसी चीज को भी नहीं छूने दिया जाता था। जब उनकी बेटी को पहले पीरियड्स आए तो उन्होंने समाज में फैली हुई ऐसी धारनाओं को दूर करने के लिए जश्न मनाया क्योंकि उनका मानना है कि यह कोई शुद्ध अशुद्ध या फिर छुआछूत की बीमारी नहीं बल्कि एक खुशी का दिन है।  

इस जश्न को मनाने के लिए रागिनी के परिवार ने पूरा घर गुब्बारे के साथ सजाया। इसके अलावा एक केक काटा केक पर उन्होंने लिखवाया था कि हैप्पी पीरियड्स रागिनी। रागिनी ने केक काटा और अपने पूरे परिवार के साथ यह सेलिब्रेशन धूमधाम के साथ मनाया। परिवार की तस्वीरें शेयर करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि – ‘बेटी बड़ी हो गई, बेटी रागिनी को पीरियड्स शुरु होने की खुशो को आज उत्सव की तरह मनाया। Happy Birthday Ragini’

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