हरियाणा के सबसे बुजुर्ग पूर्व विधायक और अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के पूर्व अध्यक्ष का 104 साल की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहे थे। खास बात यह थी कि इतनी अधिक उम्र में भी वह बिना चश्मे के अखबार पढ़ते थे और लोगों से नियमित मुलाकात करते थे।
उन्होंने एकीकृत पंजाब-हरियाणा दौर में विधायक के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी और बिश्नोई समाज में उनका बड़ा सम्मान था। उनके निधन की खबर के बाद राजनीतिक व सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कई नेताओं और समाज के लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

सहीराम धारणिया के परिवार में दो बेटे- रघुबीर और सतपाल सिंह, और दो बेटियां हैं। दोनों बेटे खेतीबाड़ी करते हैं। उनके तीन पौते हैं( रघुवीर का एक बेटा है और सतपाल के दो बेटे हैं। उनके एक तीसरे बेटे और एक बेटी की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। उनकी दूसरी बेटी की शादी राजस्थान के जोधपुर में हुई है। उनकी पत्नी रामेश्वरी देवी का देहांत 10 साल पहले हो गया था।

सोमप्रकाश ने बताया कि नाना हर साल अपना जन्मदिन खुशी के साथ मनाते थे। बीती 12 जनवरी को आखिरी जन्मदिन मनाया था। वे सादा जीवन जीते थे और चिंता मुक्त रहते थे। खेतीबाड़ी खुद करते थे। यहीं उनके सेहतमंद होने का राज है।

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