हिमाचल प्रदेश में टोल बैरियर और एंट्री फीस को लेकर छिड़े विवाद के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने बड़ा यू-टर्न ले लिया है। शिमला में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान सीएम ने सदन में ऐलान किया कि एंट्री फीस और टोल टैक्स को लेकर पहले जैसी स्थिति बहाल की जाएगी और अब वही पुराने रेट लागू होंगे, जो पहले लिए जाते थे।

दरअसल, हाल ही में सरकार ने विभिन्न फीस को जोड़कर टोल टैक्स को फास्टैग से लिंक करने का फैसला लिया था, जिससे एंट्री फीस को लेकर भ्रम और विरोध की स्थिति बन गई थी। इस फैसले के बाद विपक्ष और बाहरी राज्यों के वाहन चालकों में नाराजगी बढ़ गई थी। अब सरकार ने इसे वापस लेते हुए स्पष्ट किया है कि अलग-अलग फीस पहले की तरह ही ली जाएगी।

सीएम सुक्खू ने सदन में बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर राजा वडिंग से भी फोन पर बातचीत की है और आश्वस्त किया है कि पहले जितना शुल्क लिया जाता था, अब उतना ही लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने किसी भी श्रेणी में वास्तविक बढ़ोतरी नहीं की थी, लेकिन भ्रम की स्थिति को देखते हुए फैसला वापस लिया गया है।

नए फैसले के तहत 6 टायर वाले ट्रक का टोल 320 रुपये ही रहेगा, जबकि 10 से 14 टायर वाले वाहनों के लिए 570 रुपये शुल्क तय किया गया है। वहीं कार (5 सीटर) से 70 रुपये और 6 से 12 सीटर वाहनों से 110 रुपये ही लिए जाएंगे, यानी आम वाहन चालकों को राहत मिलेगी।

इससे पहले एंट्री टैक्स और पेट्रोल-डीजल पर सेस बढ़ाने के फैसले के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया था। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष की अगुवाई में विपक्ष ने सरकार पर ‘जनविरोधी’ नीतियां लागू करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की और मुख्य गेट तक मार्च किया।

अब सरकार के यू-टर्न के बाद साफ है कि बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच हिमाचल सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा है, जिससे आम लोगों और वाहन चालकों को राहत मिली है।

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