हरियाणा सरकार ने नगर परिषद और नगर पालिका के प्रधानों को लेकर बड़ा फैसला किया है। सरकार की और से प्रधानों ड्राइंग एंड डिस्बर्समेंट (DD) पावर खत्म कर दी है। अब प्रधान किसी भी विकास कर्य या अन्य मद में होने वाले खर्च को लेकर चेक पर हस्ताक्षर नहीं कर पाएंगे। इस अहम फैसले को लेकर सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

नोटिफिकेशन के तहत अब मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कार्यकारी अधिकारी या सचिव और लेखा प्रभारी अधिकारी संयुक्त रूप से चेक पर हस्ताक्षर करेंगे।

सरकार की और से कुछ राहत भी दी गई है। नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि विकास कार्यों के अलावा नगर परिषद और पालिकाओं की और से किए जाने वाले किसी भी कार्य की स्वीकृति पूर्ववत ही रहेगी। वह पहले ही तरह ही विकास कार्यों की मंजूरी प्रधान और पार्षदों के बोर्ड के पास ही रहेगी।

एक करोड़ तक के कार्य के साथ-साथ किसी भी टेंडर में पांच प्रतिशत तक एस्टीमेट से अधिक रेट की स्वीकृति प्रधान की अध्यक्षता में गठित वित्त एवं अनुबंध कमेटी के पास ही है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव विकास गुप्ता ने हरियाणा नगर पालिका अधिनियम 1973 की धारा 257 की उपधारा एक व दो में नगर पालिका लेखा संहिता 1930 में संशोधन किया है।

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