रोहतक स्थित रोडवेज भवन में हरियाणा कर्मचारी महासंघ संबंधित अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी परिसंघ की बैठक हुई। जिसमें सरकार की कर्मचारी व विभाग विरोधी नीतियों के खिलाफ 11 नवंबर को पानीपत से जिला सम्मेलन करके आंदोलन का आगाज करने की रणनीति बनाई।

प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों को काफी लंबे समय से लंबित किए हुए है। कर्मचारी बार-बार अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाते हैं। हर बार निराशा ही हाथ लगती रही है। आश्वासन मिलने के बावजूद भी कर्मचारियों की मांगे पूरी नहीं हो रही हैं। जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है। इसलिए आंदोलन करने का निर्णय लिया है। महासचिव सुनील खटाना ने कहा कि बिना संघर्ष के सफलता नहीं मिल सकती। पूरे प्रदेश में आंदोलन चलाने की रूपरेखा तैयार हो चुकी है। जिसकी शुरुआत 11 नवंबर को पानीपत से की जाएगी। कर्मचारियों की मुख्य मांग पुरानी पेंशन नीति लागू करना, हरियाणा रोजगार कौशल विभाग को बंद करना, पुरानी एक्सग्रेसिया नीति को लागू करना, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना आदि हैं।

हरियाणा रोडवेज के महासचिव जयबीर घनघस ने कहा कि इस बार कर्मचारी बड़ा आंदोलन चलाएंगे तथा सरकार को मांगे मानने पर मजबूर किया जाएगा। इस आंदोलन में सड़क जाम से लेकर विधानसभा घेराव तक की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार वेतन विसंगतियों को दूर करे और निजीकरण को बंद करे।

एचएसईबी वर्कर यूनियन के राज्य महासचिव यशपाल देशवाल ने कहा कि यूनियन की तरफ से हरियाणा कर्मचारी महासंघ को सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए पूरा समर्थन दिया है। बिजली विभाग का हर कर्मचारी इस लड़ाई में आगे बढ़कर काम करेगा। सरकार से अपनी जायज मांगे मनवाकर रहेंगे। अगर सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए उत्पीड़न की कोशिश करेगी तो मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा।

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