पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि मौसम के बाद हरियाणा की जनता अब सरकारी अनदेखी की मार झेल रही है। बारिश बंद होने के 5 दिन बाद भी खेतों, सड़कों और रिहायशी इलाकों से जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। अब तक किसानों को फसलों में हुए नुक्सान का मुआवजा भी नहीं दिया गया। हुड्डा ने कहा है कि खेत में पक कर तैयार खड़ी धान, बाजरा, नरमा और सब्जियों की फसल पर बारिश कहर बनकर बरसी। 2 दिनों की बारिश के चलते प्रदेशभर में किसानों की हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो गई। इसके चलते प्रत्येक किसान को हजारों रुपए का नुकसान हुआ। सरकार ने हमेशा की तरह मुआवजा देने का ऐलान तो किया लेकिन किसानों के हाथ हमेशा की तरह इंतजार ही लगा।
इससे पहले भी कई सीजन से किसान लगातार बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि और जलभराव का सामना कर रहे हैं। उसकी वजह से हुए नुक्सान का मुआवजा आजतक किसानों को नहीं दिया गया। जरूरत के वक्त किसानों की मदद के लिए न सरकार आगे आती है और न ही बीमा कंपनियां जबकि कंपनियां प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर किसानों के प्रीमियम से करोड़ों की चांदी कूट रही हैं। अब तक इस योजना से बीमा कंपनियां 40,000 करोड़ रुपए का तगड़ा मुनाफा कमा चुकी हैं। हुड्डा ने कहा कि किसान को खेत में मौसम और मंडी में सरकारी नीतियों की मार पड़ रही है। 2060 रुपए के रेट वाली धान 1700 से 1800 रुपए प्रति किं्वटल में पिट रही है। यही हाल बाजरा के किसानों का है। सरकार न तो किसानों को एम.एस.पी. दिलवा रही है और न ही अपनी घोषणा के मुताबिक बाजरा किसानों को भावांतर भरपाई योजना का लाभ दे रही है।
हुड्डा ने कहा कि बारिश के बाद गुरुग्राम, फतेहाबाद, भुना, रोहतक, हिसार, कैथल, कुरुक्षेत्र, फरीदाबाद, जींद, झज्जर, सिरसा, अम्बाला, यमुनानगर, सोनीपत, पानीपत, महेंद्रगढ़, भिवानी समेत पूरे हरियाणा से जलभराव की भयावह तस्वीरें सामने आईं। सरकार तमाशबीन बनी सब देखती रही। कांग्रेस की मांग है कि अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए सरकार जल्द निकासी की व्यवस्था करे और स्पैशल गिरदावरी करवा किसानों को उचित मुआवजा दे।
