यमुनानगर। धान के उठान में हो रही देरी को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज किसानों ने मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। ताला लगाए जाने के बाद मार्केट कमेटी के चेयरमैन और कई अधिकारी कार्यालय के अंदर ही फंस गए।
किसानों का आरोप है कि मंडियों में धान की आवक लगातार जारी है, लेकिन समय पर उठान नहीं होने के कारण फसल मंडियों में पड़ी हुई है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
किसानों ने कहा कि धान की खरीद के बाद समय पर उठान होना जरूरी है, लेकिन व्यवस्था की लापरवाही के कारण मंडियों में अनाज का ढेर बढ़ता जा रहा है। किसानों ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से जल्द से जल्द उठान व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की।
विरोध के दौरान किसानों ने अधिकारियों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की और समस्या का तत्काल समाधान करने की मांग की। किसानों का कहना है कि जब तक धान के उठान में तेजी नहीं लाई जाती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
यमुनानगर। धान के उठान में हो रही देरी को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। गुरुवार को नाराज किसानों ने जगाधरी मार्केट कमेटी कार्यालय के गेट पर ताला जड़ दिया। इस दौरान मार्केट कमेटी के अध्यक्ष सहित कई अधिकारी कार्यालय के अंदर ही फंस गए।
मामले की सूचना मिलते ही एसडीएम विश्वनाथ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर ताला खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े रहे। किसानों ने प्रशासन से मंडी में जमा धान का जल्द से जल्द उठान कराने और व्यवस्था में तेजी लाने की मांग की।
किसानों के मुताबिक, मंडी में हजारों कट्टे धान खुले में पड़े हुए हैं। लगातार आवक के चलते मंडी में अब नई फसल रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है। किसानों को आशंका है कि यदि समय रहते मंडी से धान का उठान नहीं कराया गया तो आने वाले दिनों में अन्य किसानों की फसल रखने में भी परेशानी खड़ी हो सकती है।
वहीं, बारिश का मौसम शुरू होने के कारण किसानों की चिंता और बढ़ गई है। खुले में पड़ा धान बारिश की चपेट में आने से भीगकर खराब हो सकता है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि धान के उठान में तेजी लाई जाए, ताकि मंडी में व्यवस्था बनी रहे और किसानों को अपनी फसल को लेकर किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष संजू ने बताया कि मंडी में कई हजार कट्टे धान उठान के इंतजार में पड़े हुए हैं। प्रशासन की ओर से किसानों को बताया गया कि गुरुवार को धान उठान के लिए 30 गाड़ियां लगाई जाएंगी। संजू का कहना है कि इतनी संख्या में गाड़ियों से उठान होने पर मंडी में जमा धान को हटाने में काफी समय लग जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसी बीच किसानों की नई फसल मंडी में पहुंचनी शुरू हो जाएगी, जिससे मंडी में जगह की समस्या और गंभीर हो सकती है। किसानों ने प्रशासन से उठान की गति बढ़ाने और पर्याप्त संख्या में गाड़ियां लगाने की मांग की।
एसडीएम विश्वनाथ ने किसानों को बताया कि इस संबंध में संबंधित एजेंसी से बातचीत की गई है। गुरुवार को 30 गाड़ियां लगाई गई हैं, जबकि शुक्रवार को इनकी संख्या बढ़ाकर 40 करने का आश्वासन दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि इससे धान के उठान में तेजी आएगी।
हालांकि, किसान 30 या 40 गाड़ियों से संतुष्ट नहीं हुए। किसानों ने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि मंडी में जमा धान का जल्द से जल्द उठान सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 60 गाड़ियां लगाई जाएं।
किसानों ने मंडी में धान की नमी जांच की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए। किसानों का कहना है कि आढ़तियों और मार्केट कमेटी की ओर से इस्तेमाल की जा रही नमी जांच मशीनों की रीडिंग में अंतर सामने आ रहा है। आरोप है कि एक ही धान की दोनों मशीनों पर नमी की अलग-अलग मात्रा दर्ज हो रही है। किसानों ने प्रशासन से नमी जांच की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और इस समस्या का समाधान कराने की मांग की।
किसानों का कहना है कि धान के उठान में देरी की समस्या केवल जगाधरी मंडी तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले की कई अन्य मंडियों में भी उठान की रफ्तार धीमी बनी हुई है। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक मंडियों से धान का उठान तेज नहीं किया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि, किसान धान के उठान में तेजी लाने और नमी जांच से जुड़ी शिकायतों का समाधान होने तक अपनी मांगों पर कायम रहे।
