आमतौर पर कपूर हम सबके घरों में आरती और पूजा के सामग्री के रूप में में इस्तेमाल किया जाता है।यह एक अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ होता है जो एक वनस्पति से प्राप्त होता। इससे तेज गंध आती है जो मन को एकाग्र करके उसे शांत करती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।धार्मिक रूप से तो कपूर का महत्व है ही साथ ही इसका इस्तेमाल कई सारी औषधीय प्रक्रियाओं में भी होता है।इसकी तासीर ठंडी होेने के कारण यह खुजली जलन, फुंसी व मुहासे आदि समस्याओं से छुटकारा पाने हेतु भी काम आता है।
कपूर अमूमन दो प्रकार के होते हैं एक प्राकृतिक कपूर व दूसरा कृत्रिम कपूर ,प्राकृतिक कपूर को भीमसेनी कपूर के नाम से भी पहचाना जा सकता है।इसका प्रयोग पूजा-पाठ व हवन आदि में किया जाता है। जबकि दूसरे प्रकार का कपूर कपड़ों से कीड़ें दूर रखने में प्रयोग होता है।अगर प्राकृतिक कपूर के फायदों की बात करें तो यह सर दर्द, पिंपल्स, ब्यूटी प्रोडक्टस व आँखों की कमज़ोरी आदि में आपके काम आ सकता है। प्राकृतिक व केमिकल वाले कपूर की निर्माण प्रक्रियाओं में भी अंतर पाया जाता है।
तो चलिए जानते हैं कपूर बनने की प्रोसेस के बारे में:
1.प्राकृतिक कपूर बनाने की प्रक्रिया:-आपको बता दें कि कपूर सफेद रंग के क्रिस्टल के रूप में कपूर के पेड़ की पत्तियों, छाल और लकड़ी से आसवन विधि द्वारा बनाया जाता ह।.यह एक प्राकृतिक उत्पाद होता है.कपूर का पेड़ मुख्य रूप से चीन में मिलता है। इसके बाद ही यह जापान, कोरिया, ताइवान, वियतनाम और दुनिया के अन्य देशों में पहुंचा।इस कपूर के पेड़ का बायोलॉजिकल नाम Cinnamomum camphora होता है।वहीं अगर बात करें कपूर का उत्पादन भारत में कहां-कहां होता है तो यह देहरादून, मैसूर, सहारनपुर, नीलगिरी में होता बनता है और भारत में कपूर सिर्फ पत्तियों के आसवन से ही प्राप्त किया जाता है।
2.कृत्रिम कपूर बनाने की प्रक्रिया:-कृत्रिम कपूर एक रासायनिक प्रक्रिया से बनाया जाता है और इसका रासायनिक सूत्र C10H16O होता है। यह कपूर पानी में अघुलनशील और शराब में घुलनशील होता है। अमूमन यह तारपीन के तेल को कई रासायनिक प्रक्रियाओं से गुजारने के बाद बनाया जाता है।रासायनिक कपूर का प्रयोग उपयोग पॉलीविनाइल क्लोराइड, पेंट, धुआं रहित बारूद और कुछ प्रकार के प्लास्टिक, कफ सिरप आदि के उत्पादन प्रक्रिया में होता है।
