राजस्थान पुलिस इन दिनों अपने ही एक रंगीन-मिजाज डिप्टी एसपी और महिला सिपाही की बेजा हरकतों से हलकान हुई पड़ी है. स्विमिंग पूल में संग-संग नहाते वक्त बच्चे के सामने अश्लील हरकतें पकड़े जाने पर मनमौजी डिप्टी एसपी को शुक्रवार को ही गिरफ्तार कर लिया गया था.

डिप्टी एसपी के साथ पूल में मौज मस्ती करने पहुंचीं जयपुर पुलिस आयुक्तालय में तैनात महिला सिपाही को सस्पेंड कर दिया गया था. इस सबके बाद भी स्विमिंग पूल में सिपाही संग साहब की मौज मस्ती का जिन्न शांत होने का नाम नहीं ले रहा है.

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इस मामले में हुई महकमे की छीछालेदर से आजिज राज्य पुलिस महानिदेशालय अब पूरे मामले में, एक-एक लापरवाह अफसर को छांट-छांट कर ठिकाने लगा रहा है. शनिवार को इसी क्रम में पुलिस महानिदेशालय ने चार और पुलिस अफसरों को सस्पेंड कर दिया. सस्पेंड किए गए चारों पुलिस अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने मामले की शुरूआत में ही गंभीरता से अगर जांच की होती, तो महकमे की इतनी बदनामी न हुई होती. साथ ही उनकी लेट-लतीफी के चलते पूरे घटना की जांच से संबंधित तमाम सबूत-गवाहों को भी परोक्ष-अपरोक्ष रूप से प्रभावित किए जाने का मौका दिया गया है.

राज्य पुलिस महानिदेशालय सूत्रों ने भी इन चार अफसरों के निलंबन की दबी जुबान में पुष्टि की है. बात चूंकि अपनों के द्वारा ही अपने महकमे की बदनामी की है. लिहाजा महकमा खुलकर कुछ बिना बोले ही, दोषियों को एक-एक कर कानूनी रूप से ठिकाने लगाने में जुटा हुआ है. शनिवार को जिन और चार पुलिस अफसरों को सस्पेंड किया गया है, उनमें एक डिप्टी एसपी (पुलिस उपाधीक्षक), एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) और दो थानों के थानाध्यक्ष शामिल हैं. इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.

स्विमिंग पूल में महिला सिपाही संग डिप्टी एसपी के रंग-रेलियां मनाए जाने जैसे शर्मनाक कांड की जांच में जुटी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप टीम एक अधिकारी ने, इन चारों अधिकारियों के निलंबन की पुष्टी की है. एसओजी टीम के एक अफसर की मानें तो, शनिवार को सस्पेंड किए गए अफसरों में से भी कुछ की जल्दी ही गिरफ्तारी कर लिए जाने की आशंकाओं को फिलहाल सिरे से नहीं नकारा जा सकता है. इन सभी पर आरोप है कि अगर इन सबने वक्त रहते बवाल शुरू होने के समय ही अपनी जिम्मेदारी निभाई होती, तो महकमे की इस बवाल में इस छीछालेदर होने से बच सकती थी.

स्विमिंग पूल कांड में यह भी हुए सस्पेंड
राजस्थान राज्य पुलिस महानिदेशालय सूत्रों के मुताबिक शनिवार को सस्पेंड किए गये अफसरों में कुचामन के पुलिस उपाधीक्षक (डिप्टी एसपी) मोटा राम बेनीवाल, झोटवाड़ा के सहायक पुलिस आयुक्त हरिशंकर शर्मा सहित चितावा और कालवाड़ के दोनो थानाध्यक्ष क्रमश: ओम प्रकाश मीणा और गुरु दत्त सैनी हैं.

स्विमिंग पूल में महिला सिपाही संग अश्लील हरकतें करते हुए पकड़े गए डिप्टी एसपी के खिलाफ जांच भले ही एसओजी के हवाले क्यों न कर दी गई हो. मगर इस पूरे मामले की जांच पर नजर सीधे-सीधे राज्य के पुलिस महानिदेशक (Director General of Police Rajasthan) एम एल लाठर रखे हुए हैं. कहा जाता है कि, स्विमिंग पूल में अश्लील तमाशा करने के आरोपी डिप्टी एसपी और महिला सिपाही के खिलाफ तो सीधे-सीधे एक्शन बनता ही था.

इसलिए टेढ़ी हुई DGP की नजर
इस मामले में वायरल स्विमिंग पूल के अंदर के आपत्तिजनक वीडियो ने जिस तरह से राजस्थान पुलिस की गरिमा को ठेस पहुंचाई है. उसे राज्य की हुकूमत और राज्य पुलिस महानिदेशालय आसानी से नजरंदाज कर पाने को राजी नहीं है. यही वे वजहें हैं कि अब डिप्टी एसपी की गिरफ्तारी के बाद महकमा इस मामले के दोषी एक-एक लापरवाह अफसर के खिलाफ सख्त विभागीय कदम उठा रहा है. उधर शनिवार को डीजीपी राजस्थान पुलिस ने साफ कर दिया, बाद में जिन अफसरों को निलंबित किया गया है, विभागीय जांच में अगर उनका दोष सिद्ध हो गया, तो उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

दूसरी ओर एसओजी (मामले की जांच के लिए गठित विशेष टीम) की मानी जाए तो यह पूरा मामला डिप्टी एसपी (हीरा लाल सैनी) और उनके संग वायरल वीडियो में दिखाई दे रही महिला सिपाही के रंगरेलियों या मौज मस्ती तक ही सीमित नहीं रहा है. यह मामला बाल यौन उत्पीड़न से भी जुड़ने के चलते गंभीर हो गया है. इसलिए भी राज्य पुलिस महानिदेशालय की नजरें इस मामले में टेढ़ी हो गई हैं.

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