हरियाणा के जींद जिले में लड़कियों के पहनावे, मोबाइल फोन और बाइक पर बैठने को लेकर खाप पंचायत में दिए गए बयान सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बन गए हैं। 1 अगस्त को जींद के रामराय गांव में हुई नौगामा खाप पंचायत में सदस्य वीरेंद्र ढुल ने कहा कि लड़कियां छोटे कपड़े पहनती हैं और पिता के पीछे बाइक पर दोनों तरफ पैर करके बैठती हैं, लेकिन पिता उन्हें इस तरह बैठने से रोक नहीं पाता। इसी पंचायत में एक ही गांव के युवक-युवती के लव मैरिज करने पर गांव में एंट्री बैन रखने का फैसला भी लिया गया था।
वीरेंद्र ढुल के बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लड़कियों को लेकर ऐसी सोच की आलोचना शुरू हो गई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि पंचायतों में लड़कियों के कपड़े, मोबाइल और उनके आने-जाने के तरीके पर पाबंदियों की चर्चा करने के बजाय उनकी शिक्षा, सुरक्षा और बराबरी के मुद्दों पर बात क्यों नहीं होती। 

पंचायत में वीरेंद्र ढुल ने लड़कियों के पहनावे और बाइक पर बैठने को लेकर कहा, “छोटे कपड़े लड़की पहनती है और पिता के पीछे बाइक पर दोनों तरफ टांग करके बैठती है। पिता यह नहीं कह पाता कि बेटी, तू ऐसे कैसे बैठी है।”

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे मामलों में सामाजिक स्तर पर कई चीजों को लेकर रोक-टोक की बात सामने आती है। बयान में लड़कियों को फोन देने और डीजे पर डांस करने को लेकर भी आपत्ति जताई गई।

पंचायत में मौजूद लोगों के सामने दिए गए इन बयानों का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया। सोशल मीडिया यूजर्स ने पूछा कि लड़कियों के कपड़े और मोबाइल फोन को लेकर फैसले करने के बजाय पंचायतों को उनकी सुरक्षा और शिक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।

रामराय गांव में हुई नौगामा खाप पंचायत में एक ही गांव के युवक और युवती के लव मैरिज करने को लेकर भी फैसला लिया गया। पंचायत में तय किया गया कि यदि एक ही गांव का युवक-युवती प्रेम विवाह करते हैं तो दोनों की गांव में एंट्री बैन रहेगी।

इस फैसले और लड़कियों को लेकर दिए गए बयानों ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया। विवाद का एक बड़ा हिस्सा इस बात को लेकर है कि सामाजिक पंचायतें युवाओं, खासकर लड़कियों के निजी फैसलों और रोजमर्रा की जिंदगी को लेकर किस हद तक नियम तय कर सकती हैं।

रामराय गांव में हुई नौगामा खाप पंचायत में एक ही गांव के युवक और युवती के लव मैरिज करने को लेकर भी फैसला लिया गया। पंचायत में तय किया गया कि यदि एक ही गांव का युवक-युवती प्रेम विवाह करते हैं तो दोनों की गांव में एंट्री बैन रहेगी।

इस फैसले और लड़कियों को लेकर दिए गए बयानों ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया। विवाद का एक बड़ा हिस्सा इस बात को लेकर है कि सामाजिक पंचायतें युवाओं, खासकर लड़कियों के निजी फैसलों और रोजमर्रा की जिंदगी को लेकर किस हद तक नियम तय कर सकती हैं।

गीता ढांडा नाम की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने भी वीडियो जारी कर लड़कियों के मोबाइल फोन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को हर स्तर पर दबाने की कोशिश की जा रही है और जब महिलाएं अपनी बात रखने लगती हैं तो कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आता।

खोवाल ने कहा कि कानून बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने का संवैधानिक अधिकार देता है। सुप्रीम कोर्ट भी कई फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि दो बालिग लोगों के शादी या साथ रहने के फैसले में परिवार, समुदाय या खाप पंचायत हस्तक्षेप नहीं कर सकती। किसी बालिग जोड़े को धमकी देना, हिंसा करना या जबरन गांव से बाहर करना कानून के दायरे में आ सकता है।

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