सीबीएसई 12वीं के स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने 12वीं के उन छात्र-छात्राओं को बड़ी राहत दी है, जो अगस्त में आयोजित 12वीं की इम्प्रूवमेंट परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन उनके अंक मूल परीक्षा में आए अंकों से कम हैं या फिर फेल हो गए हैं। ऐसे स्टूडेंट्स की इस समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिन यानी कि सोमवार को सुनवाई करते हुए कहा कि सीबीएसई को उन छात्रों की समस्या पर विचार करना चाहिए।

कोर्ट ने कहा, जो इस साल 12वीं कक्षा में अंक सुधारने के लिए परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन कम अंक प्राप्त हुए हैं या फिर असफल हो गए हैं। ऐसे में बोर्ड को इन स्टूडेंट्स की परेशानी को समझे, क्योंकि इससे उनके उच्च अध्ययन के लिए उनके द्वारा प्राप्त प्रवेश प्रभावित होगा।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुधार परीक्षा में बैठने वाले छात्रों ने अपने मूल परिणामों के आधार पर प्रवेश लिया है और अब ऐसे में कोई गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। बता दें कि जस्टिस एएम खानविलकर और सीटी रविकुमार की एक बेंच में इस मामले की सुनवाई चल रही है।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा है कि बोर्ड ऐसे स्टूडेंट्स के लिए अपने मूल परिणाम को बरकरार रखें, जो मूल्यांकन नीति के आधार पर प्रकाशित पहले किया गया था। इस संबंध में वकीलों ने सीबीएसई के वकील से कहा कि इम्प्रूवमेंट परीक्षा में छात्रों को कम अंक मिले हैं या फेल भी हुए हैं तो उनका दाखिला प्रभावित होगा। हालांकि यह कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है बल्कि एक बार की नीति है, इस पर विचार करें।

बता दें कि पिछले साल यानी कि 2020 में बोर्ड ने कोविड-19 महामारी की वजह से पारंपरिक तरीके से कक्षा 10 और 12 के लिए वार्षिक परीक्षा आयोजित नहीं कर सका था। ऐसे में सीबीएसई ने एक वैकल्पिक मूल्यांकन पद्धति का विकल्प चुना था। बोर्ड द्वारा एक tabulation नीति बनाई गई थी और उसी के आधार पर छात्रों को अंक दिए गए थे।

इस नीति के तहत, एक प्रावधान यह भी था, जहां छात्रों को वैकल्पिक मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में अपने अंकों में सुधार करने की स्वतंत्रता दी गई थी। इसके तहत अगस्त में परीक्षा आयोजित की गई थी। वहीं अब इस परीक्षा में कम अंक पाने वाले स्टूडेंंट्स ने यह मांग की है कि उनके मूल अंक बरकरार रखें जाए।  

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