भिवानी। गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी टीचर मनीषा की मौत के मामले में अदालत ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी है और मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। इस फैसले के बाद मनीषा के परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है। मनीषा के पिता संजय ने कहा कि परिवार की लड़ाई शुरू से ही बेटी की मौत को लेकर रही है और अब नए सिरे से जांच में सच्चाई सामने आनी चाहिए।

संजय ने कहा कि उनके वकील हर्षमोहन ने मामले में अच्छी पैरवी की। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि न्याय देने वाले को नहीं बदला जाना चाहिए। परिवार को आशंका है कि कहीं जांच से जुड़े अधिकारियों की तरह न्यायाधीश को भी न बदल दिया जाए।

परिवार शुरू से लगाता रहा हत्या का आरोप

मनीषा के परिवार का आरोप है कि उसकी हत्या की गई थी, जबकि पुलिस और CBI ने अपनी जांच में इसे आत्महत्या माना था। पिता संजय ने कहा कि अब नई जांच टीम और अधिकारियों पर परिवार की नजर रहेगी। जांच से जुड़ी जानकारी और रिपोर्ट परिवार के सामने रखी जानी चाहिए, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।

एम्स की रिपोर्ट को लेकर पिता ने उठाए सवाल

मनीषा के पिता संजय ने दावा किया कि AIIMS की रिपोर्ट में जहर खाने की पुष्टि नहीं हुई थी और उसमें गर्दन काटे जाने का उल्लेख था। उन्होंने यह भी कहा कि शरीर पर कुत्तों के काटने के निशान नहीं थे और मौके से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला था।

परिवार का आरोप है कि पर्याप्त तथ्यों के बिना मामले को आत्महत्या करार दिया गया। हालांकि, इन दावों और मेडिकल रिपोर्ट के निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के दौरान जरूरी होगी।

बोले- मेरी लड़ाई सरकार से नहीं, अन्याय के खिलाफ

संजय ने कहा, “मेरी लड़ाई सरकार से नहीं है, हमारी लड़ाई अन्याय के खिलाफ है।” उन्होंने कहा कि परिवार को केवल न्याय चाहिए। इसके लिए जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के लोग भी परिवार का साथ दे रहे हैं।

परिवार की मांग है कि मनीषा की मौत की हर पहलू से जांच हो और यदि हत्या हुई है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

13 अगस्त 2025 को खेत में मिला था मनीषा का शव

मनीषा 11 अगस्त 2025 को गांव ढाणी लक्ष्मण से प्ले स्कूल में ड्यूटी के लिए निकली थी। इसके बाद उसने नर्सिंग कॉलेज में दाखिले के लिए जाने की बात कही थी, लेकिन वह घर वापस नहीं लौटी। 13 अगस्त को उसका शव सिंघानी गांव के खेतों में मिला था।

परिवार ने हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दी और न्याय की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू किया। 18 अगस्त 2025 को पुलिस ने मामले को आत्महत्या बताया, जिसके बाद विरोध तेज हो गया।

तीसरी बार AIIMS में हुआ था पोस्टमॉर्टम

परिवार और ग्रामीणों की मांग पर मनीषा का दिल्ली AIIMS में तीसरी बार पोस्टमॉर्टम कराया गया। लगातार विरोध और आंदोलन के बीच 26 अगस्त 2025 को मामले की जांच CBI को सौंप दी गई थी।

करीब एक साल की जांच के बाद CBI ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। अब अदालत ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। इस फैसले के बाद परिवार को उम्मीद है कि नए सिरे से जांच में मनीषा की मौत की असल वजह सामने आएगी।

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