हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।

मुख्यमंत्री की होने वाली हाई-लेवल समीक्षा बैठक से ठीक पहले, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी अतिरिक्त उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की।

बैठक में काफी बड़े मुद्दे सामने आए हैं। CJP की विजिट पर रोक लगाने की वजह भी इन्हीं मुद्दों को माना जा रहा है। जिसके बाद स्कूलों में फोटो-वीडियो बनाने पर प्रतिबंध लगाया गया था। सामने आया है कि प्रदेश में 2,814 स्कूलों के (कंडम) भवन हैं, जिन्हें अब ढहाया जाएगा। इसमें काफी ऐसे भी हैं, जिनमें एक या दो कमरे ढहाए जाने हैं।

विभाग ने साफ कर दिया है कि असुरक्षित इमारतों को ढहाने से लेकर बजट खर्च न करने वाले अफसरों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में पहचान किए गए 2,814 असुरक्षित (कंडम) भवनों को ढहाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है।सभी ADCs को 30 सितंबर 2026 तक सत्यापन, कंडम घोषित करने और डिमोलिशन (ध्वस्तीकरण) का काम पूरा करने को कहा गया है।आंकड़ों में विसंगतियां पाए जाने पर ADCs को 13 सितंबर तक डेटा को दुरुस्त कर नया गूगल सीट अपडेट करने को कहा गया है

प्रदेश 647 स्कूलों में मौसमी और 53 स्कूलों में स्थायी रूप से पानी भरने की समस्या पाई गई है। एडीसी ने बताया कि VB-GRAM G फंड का इस्तेमाल मिट्टी भराव के लिए स्वतंत्र रूप से नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसमें केवल मजदूरीका प्रावधान है, सामग्रीका नहीं।निदेशक ने निर्देश दिए कि पानी को रोकने के लिए जरूरी पैरापेट/रिटेनिंग वॉल बनाई जाए। साथ ही DEO/DEEO को निर्देश दिया गया कि वे मिट्टी भराव की सामग्री के लिए तुरंत नया बजट एस्टिमेट तैयार कर DGSE/DEE को भेजें ताकि सरकार से अलग से बजट पास कराया जा सके।

पीएमओ (PMO) स्तर से निगरानी वाले इस पौधरोपण अभियान में हरियाणा ने 12.50 लाख के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 8.25 लाख पौधे लगा लिए हैं। संपूर्ण रिपोर्ट 30 सितंबर तक केंद्र के पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।अंबाला जिले ने लक्ष्य का 119% काम पूरा कर राज्य में पहला स्थान हासिल किया, जिसकी बैठक में खुले तौर पर सराहना की गई। फरीदाबाद ने महज 3 प्रतिशत और पलवल ने सिर्फ 8 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया। निदेशक ने इन जिलों के अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पौधरोपण अभियान में सुधार लाने की सख्त हिदायत दी।

प्री-प्राइमरी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने हर जिले में ‘मॉडल बाल-वाटिका’ बनाने के लिए ₹5.00 लाख प्रति जिला का बजट आवंटित किया है। प्रशासनिक मंजूरी मिले एक महीना बीत जाने के बाद भी काम शुरू न होने पर अधिकारियों को आड़े हाथों लिया गया।ADCs द्वारा हर ब्लॉक में वाटिका बनाने के सवाल पर स्पष्ट किया गया कि शुरुआती चरण में हर जिले में एक मॉडल बाल-वाटिका बनेगी। काम शुरू होने के बाद ब्लॉक स्तर के लिए अतिरिक्त बजट जारी किया जाएगा। ADCs को तुरंत काम शुरू कराने के निर्देश दिए गए।

स्कूलों में बेकार पड़े और अनसर्विसिएबल आईटी उपकरणों (कंप्यूटर, प्रिंटर आदि) को ‘हरियाणा स्टेट आईटी पॉलिसी’ के तहत निपटाने के आदेश दिए गए हैं। ADCs ने बताया कि कई उपकरण मुकदमेबाजी या AMC के तहत हैं, इसलिए उनकी पहचान के लिए फोटोग्राफ जरूरी हैं।HSSPP का आईटी सेल जल्द ही सभी संबंधित उपकरणों की तस्वीरें और विस्तृत विवरण जिलों को मुहैया कराएगा, जिसके बाद नीलामी/निपटारे की प्रक्रिया शुरू होगी

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