हरियाणा के सभी सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में टीचर और अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी गई है। सूबे के उच्च शिक्षा विभाग ने इस आशय का सर्कुलर भी जारी कर दिया है। जिसमें शिक्षकों और उससे जुड़े पदों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता के संशोधन का हवाला दिया गया है।

कॉलेजों में प्रिंसिपल और प्रोफेसर के रूप में भर्ती होने के लिए आवश्यक न्यूनतम योग्यता को संशोधित किया गया है। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग इन संशोधित योग्यता आवश्यकताओं के आधार पर निष्पक्ष और पारदर्शी चयन मानदंड पर विचार कर रहा है। इस कारण से विभाग के द्वारा कॉलेजों को कहा गया है कि जब तक इस संबंध में अगली सूचना जारी नहीं की जाती है तब तक नई भर्तियां रोके रखें।

कॉलेजों में प्रिंसिपल और प्रोफेसरों की नियुक्ति संबंधी संशोधन नवंबर में किया गया था। उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों को सर्कुलर भी जारी कर दिया था। इसके बाद से कॉलेजों में तैनात टीचरों में नौकरी के लिए इस अनिवार्यता को लेकर काफी रोष है।

हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गनाइजेशन (HFUCTO) के अध्यक्ष विकास सिवाच का कहना है कि PHD की अनिवार्यता आवश्यकता से लोगों को बैक-डेटेड प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए अनुचित साधन अपनाने को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही 65 वर्ष से अधिक आयु के रिएम्प्लॉयमेंट से युवाओं को परेशानी होगी।

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