अंबाला/रोहतक: हरियाणा के अंबाला में अंग्रेजी शराब की बड़ी खेप बिहार ले जाने के चर्चित मामले में गिरफ्तार रोहतक के 23 वर्षीय लॉ स्टूडेंट आकाश को अदालत से जमानत मिल गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार बंसल की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे 50 हजार रुपये के जमानती बॉन्ड और इतनी ही राशि की एक जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। आरोपी सितंबर 2026 से जेल में बंद था। उसने अपनी परीक्षाओं की तैयारी का हवाला देते हुए अदालत से जमानत मांगी थी।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि फिलहाल उपलब्ध जांच सामग्री में आरोपी के खिलाफ प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने वाले पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं आए हैं। आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं बताया गया है।

चावल के छिलके के नीचे छिपाकर ले जाई जा रही थीं 990 पेटी शराब

पुलिस के अनुसार, शराब तस्करी का मामला 24 अगस्त 2026 को थाना पड़ाव, अंबाला कैंट में दर्ज किया गया था। एफआईआर नंबर 271 के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने हुडा टाउन पार्क, सेक्टर-34, अंबाला कैंट के पास खड़े एक ट्रक से रॉयल स्टैग और इम्पीरियल ब्लू ब्रांड की कुल 990 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद की थी। शराब को चावल के छिलके के नीचे छिपाया गया था, ताकि उसे सामान्य माल की खेप के रूप में ले जाया जा सके।

पुलिस को ट्रक से चावल का कथित फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल भी मिला था। जांच में ट्रक का नंबर, इंजन और चेसिस नंबर से छेड़छाड़ किए जाने की बात भी सामने आई। पुलिस का दावा है कि शराब को बिहार ले जाया जा रहा था, जहां शराबबंदी लागू है।

ट्रक के आगे चलने का आरोप, सह-आरोपी के बयान में आया था नाम

पुलिस और अभियोजन पक्ष के अनुसार, आकाश और सह-आरोपी साहिल एक ब्रीजा कार में ट्रक से आगे चल रहे थे। आरोप है कि उनका काम रास्ते में पुलिस की नाकाबंदी या चेकिंग की जानकारी ट्रक चालक तक पहुंचाना था। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में आकाश का नाम सह-आरोपी दीपक चौधरी के बयान के आधार पर सामने आया था।

अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत में दलील दी कि आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन नष्ट कर दिए थे और बिहार के निवासियों के नाम पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल किया गया था। सरकारी पक्ष ने मामले को संगठित आपराधिक साजिश बताते हुए कहा कि गिरोह के मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है।

इन आधारों पर अदालत ने दी जमानत

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद अदालत ने आरोपी को जमानत देने के पक्ष में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया।

  • सीधी बरामदगी नहीं: आरोपी आकाश के कब्जे से कोई बरामदगी नहीं हुई थी और वह कथित तौर पर ट्रक के पास भी नहीं मिला था।
  • सह-आरोपी के बयान पर निर्भरता: आरोपी का नाम सह-आरोपी के पुलिस के समक्ष दिए गए बयान में सामने आया था। अदालत के समक्ष इस साक्ष्य की कानूनी स्वीकार्यता का प्रश्न भी विचारणीय था।
  • कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन के साक्ष्य का अभाव: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच में आरोपी और कथित मुख्य साजिशकर्ताओं के बीच किसी वित्तीय लेनदेन या कॉल डिटेल रिकॉर्ड के जरिए संबंध स्थापित नहीं किया गया था।
  • पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं: आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया और वह कानून की पढ़ाई कर रहा है।

इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आकाश की जमानत याचिका मंजूर कर ली। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है। मामले में आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।

गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे शराब की बड़ी खेप बिहार पहुंचाने की साजिश का आरोप लगाया है। अब अदालत से जमानत मिलने के बाद रोहतक के लॉ स्टूडेंट आकाश को राहत मिली है।

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