हरियाणा के बहुचर्चित 661 करोड़ रुपए के IDFC-AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ती जा रही है। सीनियर IAS अधिकारी आरके सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब 2007 बैच के IAS अधिकारी डीके बेहरा के लंबी छुट्टी पर जाने से नई चर्चाओं ने जन्म ले लिया है।

वर्तमान में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में सचिव पद पर तैनात डीके बेहरा 28 अगस्त तक अवकाश पर चले गए हैं। हालांकि उन्होंने छुट्टी का कारण चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास बदलना बताया है, लेकिन यह फैसला ऐसे समय में आया है जब घोटाले की जांच तेज हो चुकी है और CBI कई अधिकारियों की भूमिका खंगाल रही है।

बेहरा के नाम से हुए फर्जी लेनदेन

एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच में सामने आया है कि डीके बेहरा के कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर कई चेक और डेबिट नोट प्रोसेस किए गए। खास बात यह है कि ये लेनदेन उस समय हुए, जब बेहरा संबंधित विभाग से ट्रांसफर होकर जा चुके थे। उन्होंने 28 अक्टूबर 2025 को पद छोड़ दिया था, लेकिन इसके बाद भी उनके नाम पर वित्तीय दस्तावेजों का इस्तेमाल होता रहा।

सूत्रों के मुताबिक CBI ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत आवश्यक अनुमति हासिल कर ली है और इस मामले में बेहरा से पूछताछ भी की जा चुकी है।

जांच के घेरे में कई अधिकारी

CBI और ED दोनों एजेंसियां इस बड़े घोटाले की जांच कर रही हैं। जांच एजेंसियां बैंक खातों के संचालन, निवेश संबंधी फैसलों, प्रशासनिक मंजूरियों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं। फाइल रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जोड़ी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार मोहम्मद शाइन, पंकज अग्रवाल, विनीत गर्ग, आरके सिंह, प्रदीप कुमार, मनीराम शर्मा और संकेत कुमार समेत कई अधिकारियों के नाम जांच के दायरे में हैं। इन अधिकारियों के खिलाफ जांच के लिए हरियाणा सरकार पहले ही अनुमति दे चुकी है।

क्या है 661 करोड़ का घोटाला?

CBI की जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों की करोड़ों रुपए की राशि फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट्स के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर की गई। एजेंसी अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

इनमें बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों, निजी व्यक्तियों और दो कंपनियों के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह संगठित तरीके से किया गया वित्तीय घोटाला था, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका है।

आरके सिंह की गिरफ्तारी से बढ़ी जांच की रफ्तार

दो दिन पहले CBI ने IAS अधिकारी राम कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था। जांच में पंचकूला नगर निगम से जुड़े 9.46 करोड़ रुपए के गबन का मामला सामने आया। उस दौरान आरके सिंह नगर निगम आयुक्त के पद पर तैनात थे।

CBI का दावा है कि सरकारी धन को शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया गया और दस्तावेजों में ऐसी जानकारियां दर्ज की गईं, जिससे फर्जी लेनदेन को छिपाया जा सके। मामले के खुलासे के बाद सरकार ने 9 अप्रैल 2026 को आरके सिंह को निलंबित कर दिया था।

सरकारी गवाह की तलाश में CBI

सूत्रों के अनुसार CBI अब ऐसे अधिकारी की तलाश में है, जिसे सरकारी गवाह बनाकर पूरे घोटाले की परतें खोली जा सकें। यदि ऐसा होता है तो 661 करोड़ रुपए के इस हाई-प्रोफाइल बैंक घोटाले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

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