रोहतक केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, कर्मचारी संगठनों एवं संयुक्त किसान मोर्चा के संयुक्त आह्वान पर होने वाले देशव्यापी प्रतिरोध दिवस में सीटू से संबंधित निर्माण मजदूर, मनरेगा कामगार, आशा-मिड डे मील, ग्रामीण चौकीदार,ग्रामीण सफाई कर्मचारी, ठेका कर्मचारी, औद्योगिक श्रमिक, ट्रांसपोर्ट कर्मी समेत हजारों श्रमिक हड़ताल कर होंगे शामिल।

हड़ताल के लिए पिछले 15 दिन से चल रहे अभियान के बाद प्रेस बयान जारी करते हुए सीटू जिला प्रधान कमलेश लाहली, कोषाध्यक्ष धर्मवीर हुड्डा व जिला सचिव कामरेड विनोद ने कहा कि
केंद्र व हरियाणा की भाजपा सरकारें जनता के खून पसीने से खड़ी की गई देश की बहुमूल्य संपत्तियों को अडानी- अंबानी जैसे बड़े पूंजीपतियों और देसी- विदेशी कॉर्पोरेट के हाथों में बेचने का राष्ट्रविरोधी काम करने में लगी हैं। स्कूल में मास्टर नहीं, अस्पताल में डॉक्टर नहीं। रेलवे, बिजली, रोडवेज, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे सारे सरकारी विभागों का निजीकरण हो रहा है। ऐसा करके एक तरफ जनकल्याण की सुविधाओं से आम जनता की बेदखली है। दूसरी तरफ सरकरी क्षेत्र में नौकरी मिलने के सभी रास्ते बंद किए जा रहे हैं। लाखों पद केंद्र व राज्य सरकार के विभागों में खाली पड़े हैं जिन्हे भरा नहीं जा रहा। न ही पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल किया जा रहा। जो रोजगार है वह ठेके पर है, कच्चा है। यहां तक कि सेना की भर्ती में भी अग्निवीर योजना लाकर हमारी युवा पीढ़ी को दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर किया गया है। हमारे शिक्षित नौजवान अब जमीनों को बेच कर विदेशों में पलायन कर रहे हैं। भयंकर बेरोजगारी है।

निराशा में नौजवान नशाखोरी की चपेट में आ रहे हैं और उनकी जिंदगी बर्बाद हो रही है। इस प्रकार से देश और प्रदेश को बर्बादी के गर्त में धकेलने के लिए भाजपा की दिवालिया नीतियां जिम्मेदार हैं। जिसकी बदौलत अमीर गरीब की गैर बराबरी की खाई रोजाना चौड़ी हो रही है। किसान- खेत मजदूरों को कर्ज मुक्त करने की बजाय मोदी सरकार ने देश की धन दौलत को लूटने वाले पूंजीपतियों द्वारा लिए गए 25 लाख करोड़ रुपए माफ करने का शर्मनाक काम किया है ।
मजदूर नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार मजदूर-विरोधी चारों लेबर कोड्स पारित कर चुकी है। यह मजदूरों को गुलाम बनाने का रास्ता है। फिक्स्ड टर्म रोजगार, फ्लेक्सी वर्क, घर से काम आदि करने वालों की तादाद बहुत बढ़ गई है। इन मजदूरों को काफी कम वेतन पर 12-12 घंटे काम करवाया जाता है। जिससे अन्ततः बड़े-बड़े उद्योग अपना मुनाफा कमाते हैं। उद्योगों में 70-80 प्रतिशत मजदूर ठेके पर हैं जिनको स्थाई श्रमिकों से काफी कम वेतन मिलता है। आधे से ज्यादा मजदूरों के न रजिस्टर में नाम दर्ज होते न पीएफ कटता और न ईएसआई कार्ड बनता। 12 घंटे की अवैध रूप से डयूटी करवाकर सिंगल वेतन में भारी धोखधड़ी करवाकर मजदूरों के खून को चूसने का प्रबंध किया जा रहा है। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी धड़ल्ले से हो रहा है। महिला मजदूरों की हालात कहीं ज्यादा खराब है। हरियाणा में 7 साल से वेतन रिवाईज नहीं हो मजदूरों के रहने के लिए आवास की कोई व्यवस्था नहीं है। छोटे-छोटे कमरों में कई-कई मजदूर सुअर-भाड़ों की तरह रहने को मजबूर हैं। इन अवैध कालोनियों में किसी प्रकार की पानी निकासी, सरकारी हस्पताल-स्कूल आदि की कोई व्यवस्था नहीं है।

महंगाई आसमान छू रही है और आमदन घटती जा रही है। लोकतांत्रिक व सवैधानिक संस्थाओं धवस्त कर रही है, संविधान की बुनियादी प्रस्थापनाओं पर हमले कर रही है। पिछले कई दिनों से पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर किसानों पर हो रहा बार-बार दमन इसका ताजा उदाहरण है। इस दौरान भवन निर्माण कामगार यूनियन के जिला प्रधान रामभगत, जिला सचिव सत्यनारायण, जिला उप प्रधान संजीव सिह, आशा वर्कर्स यूनियन जिला प्रधान अनीता व सचिव सोनिया, मिड डे मील वर्कर्स यूनियन नेत्री रीना और बबीता, ग्रामीण चौकीदार सभा के भगत सिंह,ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान दलेर व संदीप, मनरेगा कामगार यूनियन रोहतक के प्रकाशचंद्र, रोहतक इंडस्ट्रियल वर्कर यूनियन के शशि रहे
