चीन में अब कोविड के पांच साल के बाद ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) का अटैक हो रहा है। मीडिया में आ रही रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें लगातार आ रही हैं कि चीन में HMPV वायरस कहर बरपा रहा है और वहां पर अस्पतालों में बेड्स की भी कमी हो गई है। दावे तो यहां तक किए जा रहे हैं कि यह वायरस कोविड जैसा कहर भी बरपा सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में 2023 में भी इस वायरस का अटैक देखने को मिला था, चीन के साथ कई दूसरे देशों में भी इस वायरस के मामले सामने आए थे। भारत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि चिंता की बात नहीं है और देश में यह एक सामान्य रेस्पिरेटरी वायरस है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) देश में श्वसन और मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों की बारीकी से निगरानी कर रहा है और चीन में HMPV के प्रकोप की हालिया रिपोर्टों के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संपर्क में है।

देश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल का कहना है कि खबरों में कहा जा रहा है कि चीन में मेटान्यूमोवायरस वायरस का एक आउटब्रेक है, जो गंभीर है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा नहीं लगता कि भारत में किसी गंभीर स्थिति की संभावना है। यहां पर मेटान्यूमोवायरस वायरस एक नॉर्मल रेस्पिरेटरी वायरस है, जो जुकाम जैसी बीमारी करता है या कुछ लोगों में फ्लू जैसे लक्षण हो सकते हैं। खासकर बुजुर्गों और एक साल से कम उम्र के बच्चों में ये लक्षण हो सकते हैं। लेकिन ऐसी कोई सीरियस बीमारी नहीं।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक का कहना है कि भारत में इन दिनों सर्दियों के मौसम में रेस्पिरेटरी वायरस इंफेक्शन होते हैं और हमारे अस्पताल और संस्थान इस स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। बेड्स, ऑक्सिजन की पर्याप्त उपलब्धता है। इस वायरस के लिए कोई खास दवाईयां नहीं चाहिए होती है क्योंकि इस वायरस के कोई स्पेशिफिक एंटीवायरल ड्रग नहीं है।

उन्होंने कहा कि न तो अस्पताल में मरीज बढ़े हैं और ICMR समेत विभिन्न माध्यमों से जो डेटा मिल रहा है, उससे पता लगता है कि सर्दियों के मौसम में जो स्थिति रहती है, करीब उसी तरह की स्थिति इस बार भी है। मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी सामान्य ही है और हर बार सर्दियों के मौसम में ऐसी स्थिति देखने को मिलती है। इस बार कोई गंभीर स्थिति नहीं है और लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।

दिल्ली मेडिकल काउंसिल के चेयरमैन और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरूण गुप्ता का कहना है कि इस मौसम में देश में वैसे ही फ्लू फैलता है। जुकाम, खांसी, बुखार, बदन दर्द जैसे लक्षण होते हैं और लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है। उनका कहना है कि भारत में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) के कारण बीमारी बढ़ने की संभावना अभी नजर नहीं है और वैसे भी यह कोई नया वायरस नहीं है। पिछले साल भी यह चीन में फैला था और 2023 में नीदरलैंड, ब्रिटेन, फिनलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका जैसे देशों में भी इस वायरस का पता चला था। उनका कहना है कि यह तो टेस्ट से ही पता चलता है कि कौन सा वायरस है, जिसके कारण वायरल बीमारियां हो रही हैं लेकिन अभी देश में वह स्थिति नहीं आई है। जुकाम, खांसी, बुखार के मरीज आ रहे हैं और इनमें भी ऐसा नहीं है कि इस बार बहुत ज्यादा केस आ रहे हैं। श्वसन रोग (रेस्पिरेटरी डिजीज) के कई कारण हो सकते हैं।

HMPV वायरस के लक्षण भी कोविड की तरह ही होती हैं। जैसे बुखार, खांसी, जुकाम, बदन दर्द। ये लक्षण फ्लू में भी होते हैं। फ़्लू या इन्फ़्लुएंज़ा एक वायरल संक्रमण होता है, जिसमें अचानक बुखार आ जाता है। सूखी या लगातार खांसी, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और कमज़ोरी, मतली, उल्टी और डायरिया भी होता है। HMPV वायरस एक RNA वायरस है, जो न्युमोवायरिडे फैमिली के मेटापन्यूमोवायरस क्लास से जुड़ा हुआ है। करीब दो दशक पहले 2001 में पहली बार डच रिसर्चर ने इसकी खोज की थी। यह निमोनिया करने वाले वायरस की फैमिली से आता है। इसके कारण होने वाले इंफेक्शन की वजह से अपर और लोअर रेस्पिरेटरी डिजीज हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक सामान्य रेस्पिरेटरी डिजीज से जुड़ी समस्या है, जो पूरी दुनिया में फैल चुकी है। बुजुर्गों, बच्चों और उन लोगों को ज्यादा समस्या होती है, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है।

चीन में पांच वर्ष पहले कोविड के दौरान भी ऐसे ही मामले आए थे और धीरे-धीरे बीमारी ने गति पकड़ी थी। लोग इससे डरे हुए हैं। बीमारी में हल्के-हल्के लक्षण दिखाती है। लेकिन लोगों में डर है कि कहीं यह कोरोना की तरह रूप बदलकर जानलेवा न बन जाए। अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसमें छोटे बच्चे, बुजुर्गों और जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर हो, उनको यह बीमारी आसानी से पकड़ती है और ठीक होने में भी समय लगता है।

HMPV वायरस खांसने और छींकने से ज्यादा फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से यह वायरस फैलता है। हाथ मिलाना, वायरस से दूषित किसी वस्तु को छूने से भी यह बीमारी फैलती है। संक्रमित होने के बाद 3 से 5 दिनों में लक्षण दिखने लगते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो यह वायरस वैसे तो हर समय ही रहता है लेकिन सर्दियों के मौसम में ज्यादा केस देखने को मिलते हैं। वायरस का असर अगर ज्यादा है तो निमोनिया और ब्रोंकाइटिस होने का खतरा भी बन जाता है।

जिस तरह से कोविड के दौरान बचाव के उपाय किए गए थे, उसी तरह के उपाय अब किए जाएं। डॉ. अरूण गुप्ता का कहना है कि इस मौसम में वैसे भी खांसी- जुकाम और बुखार के केस ज्यादा होते हैं तो जरूरी है कि बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग जरूर करें। बाहर से आने पर हाथ जरूर साफ करें, सैनेटाइजर का प्रयोग करें और डॉक्टर की सलाह के बिना अपने आप कोई दवा न लें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। फिलहाल इसका कोई टीका नहीं है, लेकिन इसके लक्षण सर्दी-जुकाम जैसे होते हैं।

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