पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि किसी महिला से अनचाही बात शुरू करने की कोशिश करना कोई अपराध नहीं है। भले ही बातचीत की कोशिश महिला को परेशान कर दे या उसे पसंद न आए।

जस्टिस कीर्ति सिंह की कोर्ट रोहतक PGI में मेडिकल स्टूडेंट से छेड़छाड़ की एक घटना में FIR के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि यह अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत अस्मिता भंग करने जैसा अपराध नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने केस को खारिज कर दिया।

बचाव पक्ष के वकील एडवोकेट अमन पाल के मुताबिक, यह मामला साल 2019 का है। उस समय शिकायतकर्ता युवती और आरोपी युवक दोनों रोहतक PGI में स्टूडेंट थे। एक दिन युवती ने पुलिस को शिकायत दी कि उसके साथ युवक ने छेड़छाड़ की है।

युवती ने पुलिस को बताया था कि वह लाइब्रेरी में बैठी थी। इसी दौरान आरोपी युवक उसके पास आकर बैठ गया। उसने अंग्रेजी में बोला- हे, आई वांट टू टॉक टू यू (सुनो, मैं तुमसे बात करना चाहता हूं।) और बात करने की कोशिश की। ऐसा उसने कई बार किया।

शिकायत के मुताबिक, युवक ने युवती को बताया था कि वह एनेस्थीसिया रेजिडेंट है। उसने युवती को स्कूटी पर देखा था। इसके बाद वह बात करने लाइब्रेरी में चला आया। जबकि, युवती बार-बार उससे कहती रही- आई डोंट वांट टू टॉक टू यू (मैं तुमसे बात नहीं करना चाहती)।

शिकायत के मुताबिक, युवक ने युवती को बताया था कि वह एनेस्थीसिया रेजिडेंट है। उसने युवती को स्कूटी पर देखा था। इसके बाद वह बात करने लाइब्रेरी में चला आया। जबकि, युवती बार-बार उससे कहती रही- आई डोंट वांट टू टॉक टू यू (मैं तुमसे बात नहीं करना चाहती)।

बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि युवती ने FIR में बताया है कि इसके बाद आरोपी युवक वहां से चला गया। युवती ने बयान में यह भी माना है कि आरोपी ने उसके साथ न तो कोई जोर-जबरदस्ती की और न ही उस पर हमला किया। ​​​​​​इसके बाद युवती ने छेड़छाड़ की FIR दर्ज करवा दी।

जस्टिस कीर्ति की कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी ने न तो किसी तरह का शारीरिक बल प्रयोग किया और न ही कोई छेड़छाड़ की। सिर्फ बातचीत शुरू करने की कोशिश करना ऐसा अपराध नहीं है जिससे महिला की शालीनता भंग हो।

  • कोर्ट ने कहा- इस मामले में IPC की धारा 354 के जरूरी तत्व यहां पूरे नहीं होते। ऐसे हालात में केस चलाना कानून का दुरुपयोग होगा।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अमन पाल, राज्य की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल बृजेश शर्मा और पीड़िता की ओर से एडवोकेट अमित राव अदालत में पेश हुए थे

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