रोहतक में बैंसी गांव में मकान की छत गिरने से बड़ा हादसा हुआ है। जिसमें 15 वर्षीय छात्रा की मौत हो गई। वहीं बुजुर्ग दादी घायल हो गई। हादसा देर रात 12:30 बजे का बताया जा रहा है जानकारी के अनुसार छात्रा उस दौरान पढ़ाई कर रही थी। छात्रा की मां का दो साल पहले ही देहांत हो चुका है और अब उनके परिवार में बूढ़ी दादी, बीमार पिता के अलावा एक 6 साल का भाई रह गया है। घायल दादी को उपचार के लिए पीजीआइ दाखिल कराया गया है। रोहतक में एक महीने में मकान गिरने का ये तीसरा हादसा है।
रेणु लाखनमाजरा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 11वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी। भले ही आर्थिक स्थिति कितनी भी खराब हो, मगर रेणु बेहद मन लगाकर पढ़ाई करती थी। यही वजह है कि दसवीं कक्षा में शानदार अंक लाने को लेकर उन्हें सम्मानित किया गया था। रेणु डाक्टर बनना चाहती थी। हादसे के वक्त भी वह पढ़ रही थी। डॉक्टर बनने का सपना रेनू का अधूरा रह गया
रेणु पढाई में हमेशा अव्वल रहती थी। बिना किसी tution के घर पर ही पड़ती थी बल्कि अध्यापकों से ही स्कूल टाइम या आधी छुट्टी में समस्या का हल करवाती थी। सभी अध्यापक उसका इस कार्य के लिए सहयोग करते थे। स्कूल में कार्यरत अध्यापिका ने बताया की वह दो दिन पहले ही अपनी डीएमसी लेकर गई है। सभी अध्यापकों ने उसे हर सम्भव सहयोग करने के लिए कहा हुआ था। रेणु ने 500 में से 388 अंक प्राप्त किए थे।
रेनू के अध्यापकों ने बताया कि रेणु ने हमेशा नकल का विरोध किया। वह कहती थी की डॉक्टर बनकर गरीब लोगों की सेवा करना चाहती हूं क्योंकि उनकी मां का ठीक से इलाज नहीं होने के कारण लगभग 3 वर्ष पहले दिमाग की नस फटने के कारण मृत्यु हो गई थी। पिता भी बीमार रहते हैं भाई अभी बहुत छोटा है। घर का सारा काम व घर में लगभग 105 वर्षीय दादी का ख्याल रखना पड़ता था। स्कूल के प्राचार्य रहे जयभगवान सिंहमार के अनुसार रेनू ने स्कूल में एक मिनट भी खराब नहीं किया। वे समझते थे कि रेणु 2020-21 में लगभग 95 फीसदी अंक प्राप्त करेगी लेकिन घर की व्यस्तता के कारण वह कुछ हद तक पिछड़ गई।
